बड़ा उदासीन अखाड़े से जुड़े 5 हजार से अधिक संतों के कुंभ में आने की उम्मीद है।
कुशावर्त कुंड में स्नान का विशेष महत्व, 31 अक्टूबर के बाद तय होगी धर्म ध्वजारोहण की तारीख।
अखाड़े ने निष्कासित पूर्व मुकामी महंत रघुमुनि की वापसी पर रोक लगाने का फैसला किया है।
Bada Udasin Akhada Decisions: देशभर में मौजूद 13 अखाड़े में से उदासीन परंपरा का अखाड़ा बड़ा उदासीन के भ्रमणशील मंडल के श्री महंत त्रंबकेश्वर नासिक सिंहस्थ कुंभ मेला प्रभारी श्री महंत दुर्गा दास ने नवभारत से बातचीत करते समय कहा कि जब देव और दानवों में समुद्र मंथन के बाद अमृत कलश की छीना झपटी आकाश में हो रही थी उस समय अमृत कलश की कुछ बूंद त्रंबकेश्वर के पवित्र पावन कुशावर्त कुंड में गिरी थी।
यही कारण है कि सिंहस्थ या कुंभ के समय त्रयंबकेश्वर के कुशावर्त कुंड में स्नान का विशेष महत्व है। वैसे भी गौतम ऋषि साधना और तप की यह पावन भूमि है जहां पर आज भी त्र्यंबक राजा ब्रह्मा विष्णु महेश के रूप में मौजूद होकर मानव जाति के कल्याण और सुख समृद्धि ऐश्वर्य प्रदान करते हैं।
श्री महंत दुर्गा दास महाराज जी ने बताया कि संन्यास की परंपरा में उदासीन परंपरा लगभग 16वीं शताब्दी में आई और इस परंपरा की नीव सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरुदेव नानक के पुत्र भगवान श्री चंद्राचार्य ( बाबा श्री चंद्र ) ने रखी थी। और इस उदासीन संत परंपरा की शुरुआत देश के प्रसिद्ध ऋषि संनकदिक को भी माना जाता है।
श्री महंत दुर्गादास महाराज जी ने बताया कि बड़ा उदासीन अखाड़े में कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने की तैयारी शुरू हो गई हैं कुंभ के समय देश भर से 5000 से ज्यादा बड़ा उदासीन अखाड़े से जुड़े संत महंत महामंडलेश्वर आएंगे प्रशासन द्वारा जो साधु ग्राम बनाया जा रहा है।
वहां पर महामंडलेश्वर और संत अपनी छावनी लगाएंगे लेकिन अखाड़े की कुंभ की गतिविधियां त्रंबकेश्वर स्थित अखाड़े से ही संचालित होगी जहां पर सबसे पहले धर्म ध्वज फहराया जाएगा, उसके बाद अखाड़ा प्रवेश होगा अखाड़े में धर्म ध्वजा कब फहराई जाएगी इसका फैसला 31 अक्टूबर को धर्म ध्वजारोहण के बाद ही किया जाएगा।
वैसे तो बड़ा उदासीन अखाड़े में सिद्ध संतों की कोई कमी नहीं है लेकिन कुंभ के दौरान रमन रेती वृंदावन के प्रसिद्ध संत और बड़ा उदासीन के महामंडलेश्वर गुरु कृष्ण का विशाल कैंप और संन्यासी परंपरा के 52 मढ़ियों में से एक लामा मढ़ी के संत दलाई लामा और देश नहीं विदेश भर में अपने योग और आयुर्वेद के कारण चर्चित रामदेव इसी अखाड़े की परंपरा से जुड़े हैं और कुंभ के दौरान वह जनता के बीच में आकर्षण का केंद्र बनते हैं।
बड़ा उदासीन में विगत दिनों देश भर के मुकामी महंत भ्रमणशील महंत रमता पांच और पंच परमेश्वरों की बैठक का आयोजन किया गया था जिसमें अखाड़े और कुंभ को लेकर कई बड़े फैसले भी किए गए जिसमें एक महत्वपूर्ण फैसला यह भी रहा की त्रंबकेश्वर शहर स्थित बड़ा उदासीन अखाड़े के पूर्व में मुकामी महंत रह चुके रघु मुनि का अब दोबारा अखाड़े में प्रवेश नहीं होगा।
यहां पर यह बता दिया जाए की अखाड़े के संचालन में कई विवाद और जमीनी घोटाला के आरोप में बड़ा उदासीन ने रघु मुनि को अखाड़े से निष्कासित कर दिया था और ऐसी संभावना थी कि सिंहस्थ कुंभ के पहले निष्कासन हटाकर रघु मुनि को दोबारा अखाड़े में वापस लिया जा सकता है।
लेकिन बड़ा उदासीन के सभी मुकामी महंत प्रमुख संत और ब्रह्मणशील मंडल के साथ पंच परमेश्वर ने यह निर्णय लिया है कि किसी भी का निष्कासन वापस नहीं लिया जाएगा और इसी के साथ रघु मुनि की वापसी अब संभव नहीं है।