Sharad Shinde Anticipatory Bail Rejected: शालार्थ आईडी घोटाले के आरोपी तथा शैक्षणिक संस्थान के संचालक शरद दयाराम शिंदे की अग्रिम जमानत याचिका को माननीय मुंबई उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति माधव जे. जामदार ने 29 सितंबर को पारित किया।
इस प्रकरण में नासिक रोड पुलिस स्टेशन में अपराध क्रमांक 164/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 3(5), 340(2), 338, 336(3), 318(4) और 316(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच में वर्ष 2022 से 2024 की अवधि के दौरान विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियों में भारी गड़बड़ी व अनियमितताएं सामने आई हैं। इस पूरे मामले में लगभग 125 आरोपी शामिल हैं, जिनमें से याचिकाकर्ता से जुड़ी तीन शैक्षणिक संस्थाओं के 32 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों की गहन जांच की जा रही है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, अदालत के आदेश में उल्लेख किया गया है कि संबंधित नियुक्तियां वास्तव में वर्ष 2022-24 में की गई थीं, लेकिन कागजों पर उन्हें वर्ष 2011-12 की अवधि का बताकर राज्य सरकार से लगभग 3 करोड़ 66 लाख 22 हजार 103 की भारी-भरकम राशि वेतन के रूप में प्राप्त की गई।
इसके अलावा, अभियोजन पक्ष ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि जांच में यह बात सामने आई है कि संबंधित कर्मचारियों से खाली चेक लेकर उनके जरिए रकम याचिकाकर्ता के रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर की गई। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वह वर्ष 2022-27 की अवधि में ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर नहीं थे और इस संबंध में उन्होंने चेंज रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
हालांकि, चैरिटी कमिश्नर (धर्मदाय आयुक्त) कार्यालय से प्राप्त प्रमाणित दस्तावेजों से अदालत के संज्ञान में आया कि याचिकाकर्ता ही उस अवधि में 'रिपोर्टिंग ट्रस्टी' थे तथा ट्रस्ट की कार्यकारी समिति में बदलाव का रिकॉर्ड भी उन्हीं के माध्यम से दर्ज कराया गया था।
अदालत ने गंभीर टिप्पणी की
अदालत ने आवेदन के साथ पेश की गई चेंज रिपोर्ट पर प्रथम दृष्टया फर्जीवाड़ा और जालसाजी किए जाने की गंभीर टिप्पणी की। इसके अतिरिक्त, जांच के दौरान नासिक रोड पुलिस स्टेशन के इनवर्ड/आउटवर्ड रजिस्टर (आवक-जावक रजिस्टर) को जब्त कर लिया गया है, जिसमें बाद की तारीखों में प्रविष्टियां की गई पाई गईं।
अदालती आदेश में CCTV फुटेज का हवाला देते हुए उल्लेख किया गया है कि याचिकाकर्ता 4 जून 2025 को लगभग 50 मिनट तक पुलिस स्टेशन के एंटी-चेंबर में उपस्थित थे।
मामले की बेहद गंभीर प्रकृति, जांच के दौरान सामने आए पुख्ता दस्तावेजों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने माना कि प्रभावी व निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी की पुलिस हिरासत में पूछताछ अत्यंत आवश्यक है।
इसके बाद, माननीय उच्च न्यायालय ने शरद दयाराम शिंदे की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हें पूर्व में प्रदान किया गया अंतरिम संरक्षण तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।