

Bengal Club Durga Puja Kunti Puja In Mumbai: शारदीय नवरात्रि के आगमन के साथ ही मुंबई में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्रि पर्व को लेकर शहर के विभिन्न मंदिरों, देवी मंदिरों और नवरात्रि उत्सव मंडलों में तैयारियां शुरू हो गई है।
कहीं मंदिरों में रंग रोगन और सजावट का काम चल रहा है तो कहीं पंडालों के निर्माण के साथ देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम जारी है। आने वाले दिनों में शहर के विभिन्न हिस्सों में भक्ति, संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों का माहौल देखने को मिलेगा।
इसी क्रम में पश्चिम भारत में बंगाली समुदाय की सामाजिक संस्था बंगाल क्लब की ओर से दादर (पश्चिम) स्थित शिवाजी पार्क में बड़े स्तर पर आयोजित किए जाने वाले दुर्गा पूजा उत्सव के लिए बुधवार को विधिवत खूंटी पूजा की गई।
खूंटी पूजा के साथ ही दुर्गा पूजा पंडाल के निर्माण की औपचारिक शुरुआत हुई। इस अवसर पर बंगाल क्लब के पदाधिकारियों और सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में समुदाय के लोग मौजूद रहे। बंगाल क्लब के मुख्य संयोजक जॉय चक्रवर्ती ने बताया कि शिवाजी पार्क में आयोजित होने वाले दुर्गोत्सव में हर वर्ष पंडाल को एक नई थीम के आधार पर तैयार किया जाता है।
पंडाल की सजावट, निर्माण शैली और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में बंगाल की कला व परंपराओं की झलक देने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी पार्क का दुर्गा पूजा उत्सव बंगाली रीति रिवाजों और परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया जाता है, जिसमें पूजा की विधि से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक बंगाल की विशेष छाप दिखाई देती है।
चक्रवर्ती के अनुसार पूजा में इस्तेमाल होने वाली कई पारंपरिक सामग्री बंगाल से मंगाई जाती है। पंडाल निर्माण में भी परंपरा और आधुनिक प्रस्तुति के बीच संतुलन रखने का प्रयास किया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं के साथ मुंबई आने वाले अन्य दर्शकों को भी बंगाली संस्कृति और दुर्गोत्सव की परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिल सके।
बंगाल क्लब के अध्यक्ष दिलीप कुमार दास ने बताया कि दुर्गा पूजा के लिए मां दुर्गा के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश प्रतिमा और कार्तिकेय की प्रतिमाओं का निर्माण पारंपरिक तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बंगाल के हुगली तट से लाई गई मिट्टी और गंगाजल के मिश्रण का इस्तेमाल प्रतिमा निर्माण में किया जा रहा है।
पारंपरिक कलाकार प्रतिमाओं को तैयार करने में मिट्टी के साथ धान के पुआल जैसी पारंपरिक सामग्री का भी उपयोग कर रहे हैं। क्लब के पदाधिकारियों के अनुसार प्रतिमाओं के निर्माण से लेकर पूजा की तैयारियों तक बंगाली परंपरा का विशेष ध्यान रखा जाता है।
प्रतिमाओं की सजावट और श्रृंगार में भी पारंपरिक शैली को प्रमुखता दी जाती है। इससे मुंबई में रहने वाले बंगाली समुदाय को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
मुंबई शहर की शिवाजी पार्क का दुर्गोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके माध्यम से बंगाली कला, साहित्य, खान-पान और परंपराओं को भी मंच मिलता है। दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली परिधान और खान पान से जुड़े विशेष आयोजन किए जाएंगे।
इसके साथ ही पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जहां साहित्य और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों को बंगाली साहित्य से परिचित होने का अवसर मिलेगा। उत्सव के दौरान बंगाली संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
इनमें बच्चों, युवाओं और समुदाय के अन्य सदस्य भाग लेते हैं। गीत संगीत, साहित्य और पारंपरिक सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी को बंगाली परंपराओं से जोड़ने का भी प्रयास किया जाता है।