Nashik Shalarth ID Scam Crime Branch Investigation: शालार्थ प्रणाली में कथित फर्जी नियुक्तियों और आईडी के जरिए 160 करोड़ रुपए से अधिक के गबन के मामले की जांच तेज हो गई है। SIT ने उत्तर महाराष्ट्र के चार जिलों में दस्तावेज जब्त किए हैं, जबकि क्राइम ब्रांच ने जांच के लिए 11 टीमें गठित की हैं।
नासिक, शिक्षा विभाग की आधिकारिक शालार्थ प्रणाली के कथित दुरुपयोग और फर्जी नियुक्तियों के जरिए सरकारी राशि के गबन के मामले में नासिक पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में 160 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के गबन का आरोप है। विशेष जांच दल (SIT) ने उत्तर महाराष्ट्र के चार जिलों में अभियान शुरू कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, सेवा पुस्तिकाएं और संबंधित फाइलें जब्त की हैं।
इस मामले में नासिक रोड पुलिस थाने में मार्च 2025 और मार्च 2026 में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। इसके बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
जांच के दौरान 841 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कथित फर्जी शालार्थ आईडी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की जांच में इस पूरे मामले से जुड़े करीब 1,200 संदिग्ध लोगों की पहचान किए जाने की बात सामने आई है।
जांच का सबसे बड़ा दायरा जलगांव जिले में सामने आया है। इसके अलावा नासिक, धुलिया और नंदुरबार जिलों में भी संदिग्ध स्कूलों, शिक्षण संस्थाओं और शिक्षा विभाग से जुड़े कार्यालयों की जांच की जा रही है।
SIT जांच की टीमें संदिग्ध स्कूलों और संस्थाओं के साथ ही संबंधित शिक्षा विभाग के कार्यालयों में पहुंचकर मूल दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। सेवा पुस्तिकाओं, नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड और शालार्थ प्रणाली से जुड़े दस्तावेजों को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
मामले में कार्रवाई बढ़ने के बाद कुछ संस्थाचालकों, प्रधानाध्यापकों और कथित बिचौलियों के सत्र न्यायालय का रुख करने की भी जानकारी सामने आई है। वहीं, क्राइम ब्रांच ने कुछ संदिग्धों को नासिक बुलाकर पूछताछ शुरू की है।
पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच ने जांच के लिए एक मुख्य टीम और 10 उप-टीमें, यानी कुल 11 टीमें गठित की हैं। फिलहाल जलगांव, धुलिया और नासिक में दो-दो तथा नंदुरबार में एक विशेष टीम तैनात की गई है।
पुलिस अब दस्तावेजों, नियुक्तियों और शालार्थ आईडी के बीच संबंधों की जांच कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ कथित फर्जी नियुक्तियों और सरकारी राशि के लेनदेन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।