नासिक की सड़कों पर गड्ढे, नागरिकों की जान को खतरा (फोटो नवभारत)
नासिक

सड़क या मौत का सफर? नासिक में पंचवटी की सड़कों पर गड्ढों का राज, रोज जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे लोग

Nashik Roads Potholes: पंचवटी के प्रमुख मार्ग गड्ढों से बदहाल हैं। हादसों और धूल से नागरिक परेशान हैं, जबकि 'मेरी' परिसर में बेहतर सड़क निर्माण को लेकर भेदभाव के आरोप हैं।

आलोक उमाकृष्ण

Citizens Risk Lives Amid Neglect: नासिक जिले में पंचवटी क्षेत्र के मखमलाबाद, पेठ रोड, अमृतधाम, जत्रा होटल परिसर, सागर विलेज, आड़गांव, म्हसरूल और इनसे जुड़े लिंक रोड तथा कॉलोनियों की सड़कों पर सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

पूरे इलाके में शायद ही कोई ऐसी सड़क बची हो जहां छोटे-बड़े गड्ढे न हों। मुख्य चौराहों से लेकर व्यस्त बाजारों और घनी आबादी वाले मार्गों तक, हर तरफ गड्ढों का बोलबाला है। वाहन चालकों के सामने रोजाना गड्ढों से बचने और अपनी जान बचाने की दोहरी चुनौती खड़ी है।

इन खतरनाक गड्ढों के कारण आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। कई परिवारों के कमाने वाले सदस्य इन हादसों का शिकार हो चुके हैं, तो कई लोग स्थायी रूप से विकलांगता का शिकार हुए हैं।

अधूरे व खुदे रास्ते और उड़ती धूल से नागरिक त्रस्त

दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों के परिजनों को मनपा प्रशासन की ओर से पांच लाख रुपये की मामूली सहायता दी जाती है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पैसों की मदद से खोई हुई जिंदगी वापस लौट सकती है? प्रशासन की यह तात्कालिक राहत मूल समस्या का समाधान करने में नाकाम रही है।

धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्यों के कारण स्थानीय निवासियों में गहरा रोष है। क्षेत्र में जिन चुनिंदा सड़कों का काम जारी है, उनकी रफ्तार इतनी धीमी है कि नागरिकों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। जगह-जगह खोदे गए रास्ते, लगातार उड़ती धूल और अधूरे पड़े निर्माण कार्यों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसके बावजूद नासिक मनपा प्रशासन इस समस्या पर कोई ठोस ध्यान नहीं दे रहा है।

'मेरी' परिसर में चकाचौंध, आम सड़कें खस्ताहाल

एक तरफ जहां हजारों नागरिक रोज बदहाल सड़कों का दंश झेल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पंचवटी स्थित जल संसाधन विभाग (मेरी) के कार्यालय और कॉलोनी परिसर में चमचमाती सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें तेजी से बनाई जा रही हैं।

जिस शांत इलाके में नागरिकों या कर्मचारियों की ज्यादा आवाजाही नहीं होती, वहां सरकारी खजाने से कंक्रीट की बर्बादी की जा रही है, जबकि रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही वाले मुख्य मार्गों की सामान्य मरम्मत भी सही ढंग से नहीं हो रही। प्रशासन के इस भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर पंचवटी के नागरिकों में भारी गुस्सा है।

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