वृक्षों के कटाई की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)  
नासिक

नासिक में पर्यावरण का महाकुंभ: विकास की वेदी पर चढ़ते वृक्षों को बचाने सड़कों पर उतरेंगे नागरिक

Heritage Trees Conservation: नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेले और विकास कार्यों के नाम पर काटे जा रहे हजारों विरासत वृक्षों के विरोध में 21 अप्रैल को मोर्चा निकाला जाएगा। जानें क्या है नागरिकों की मांगे?

गोरक्ष पोफली

Nashik Heritage Trees Conservation: 'दक्षिण गंगा' गोदावरी के तट पर बसे ऐतिहासिक शहर नासिक में इन दिनों विकास और पर्यावरण के बीच एक बड़ा संघर्ष छिड़ा हुआ है। आगामी सिंहस्थ कुंभमेले और बुनियादी ढांचे के विस्तार के नाम पर शहर की हरियाली पर जिस तरह कुल्हाड़ी चलाई जा रही है, उसने अब एक जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। पीपल्स ट्री सिटीजन मूवमेंट ने इस बेसुमार कटाई के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

नागरिक चेतना का विशाल प्रदर्शन

संगठन की ओर से घोषणा की गई है कि आगामी मंगलवार, 21 अप्रैल को शहर की सड़कों पर जन-सैलाब उमड़ेगा। यह विशाल मोर्चा सुबह 10 बजे बीवाईके (BYK) कॉलेज सिग्नल से शुरू होकर नासिक नगर निगम के मुख्यालय, राजीव गांधी भवन तक जाएगा। इस मोर्चे का उद्देश्य प्रशासन की नींद उड़ाना और शहर के फेफड़ों को बचाना है।

विरासत वृक्षों का कत्लेआम

आंदोलनकारियों का आरोप बेहद गंभीर है। उनका कहना है कि नगर निगम विकास की आड़ में बरगद, पीपल और गूलर जैसे उन विरासत वृक्षों (Heritage Trees) को भी काट रहा है, जो सदियों से शहर की पहचान रहे हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर पेड़ों को बिना किसी वैध अनुमति के काटा जा रहा है। यह न केवल पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश है, बल्कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए संरक्षण आदेशों का भी स्पष्ट उल्लंघन है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन वैकल्पिक रास्तों या पेड़ों के पुनर्प्रत्यारोपण (Transplantation) पर विचार करने के बजाय उन्हें जड़ से खत्म करने को प्राथमिकता दे रहा है।

5,000 से अधिक नागरिकों का समर्थन

यह आंदोलन केवल कुछ पर्यावरणविदों तक सीमित नहीं है। 10 अप्रैल से शुरू किए गए व्यापक हस्ताक्षर अभियान को नासिक की जनता का जबरदस्त समर्थन मिला है। अब तक 5,000 से अधिक स्थानीय नागरिकों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज कराया है।

स्थानीय पर्यावरण प्रेमीयों का कहना है कि नासिक की पहचान यहाँ की हरियाली और शुद्ध हवा से है। यदि हम विकास के नाम पर अपने पुरखों के लगाए पेड़ों को ही खो देंगे, तो कुंभ जैसे महापर्व का आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व क्या रह जाएगा?

योजनाओं में पर्यावरण विशेषज्ञों को करे शामिल

पीपल्स ट्री सिटीजन मूवमेंट की स्पष्ट मांग है कि पेड़ों की कटाई तुरंत रोकी जाए और विकास की योजनाओं में पर्यावरण विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। कल होने वाला यह आंदोलन न केवल प्रशासन को चेतावनी देगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि भविष्य का नासिक कंक्रीट का जंगल होगा या फिर अपनी प्राकृतिक संपदा के साथ फलेगा-फूलेगा।

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