म्हाडा प्रकरण के बाद नासिक में नए प्रोजेक्ट घटे (सोर्स: AI)
नासिक

म्हाडा कार्रवाई के बाद नासिक में निर्माण क्षेत्र की रफ्तार धीमी, प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए इंतजार कर रहे बिल्डर

Nashik Construction Project Approvals: म्हाडा प्रकरण में कार्रवाई के बाद नासिक के निर्माण व्यवसायियों में असमंजस बढ़ा है। नए प्रोजेक्ट और निवेश में सावधानी से मनपा के राजस्व पर असर की आशंका है।

आलोक उमाकृष्ण

MHADA New Construction Project Approvals: म्हाडा आवास प्रकरण में हुई कार्रवाई के बाद नासिक के निर्माण व्यवसायियों में अब भी आशंका का माहौल बना हुआ है। इसका असर शहर के पूरे निर्माण क्षेत्र पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

इस प्रकरण के बाद निर्माण व्यवसायियों द्वारा नए प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए मनपा के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रमाण तेजी से घटा है। नई परियोजनाओं में निवेश को लेकर भी व्यवसायियों ने सावधानी बरतना शुरू कर दिया है।

म्हाडा प्रकरण में कार्रवाई शुरू होने के बाद अब तक मंजूरी के लिए दाखिल हुए नए प्रोजेक्ट की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक ही होने की जानकारी सामने आ रही है। परिणामस्वरूप निर्माण क्षेत्र में करोड़ों रुपये की आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ने के साथ ही मनपा के राजस्व पर भी असर पड़ने की आशंका है।

शहर की लगातार बढ़ रही आबादी

नासिक में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरीकरण हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ आवास, व्यावसायिक स्थान और नए आवासीय प्रोजेक्ट की मांग भी बढ़ी है। इसके चलते मनपा के नगररचना विभाग के पास लगातार नए प्रस्ताव आते रहे हैं।

लेकिन म्हाडा प्रकरण में कथित फर्जी दस्तावेज, भूखंड विभाजन और 20 प्रतिशत समावेशी आवास योजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना है।

मंजूरी लें या इंतजार करें?

नए प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने से लेकर वास्तुरचना, विभिन्न मंजूरियां, विकास शुल्क, टीडीआर-एफएसआई, निर्माण लागत औ०र वित्तीय व्यवस्था तक बड़ी राशि निवेश करनी पड़ती है। ऐसे में आज मंजूर किया गया प्रोजेक्ट कल किसी जांच के दायरे में आएगा या नहीं, दस्तावेजों की दोबारा जांच होगी या नहीं और प्रशासनिक नियमों में फिर कोई बदलाव होगा या नहीं, ऐसे सवाल निर्माण व्यवसायियों के सामने खड़े हैं।

म्हाडा प्रकरण में कार्रवाई का दायरा बढ़ने से यह आशंका और गहरी हुई है। मनपा के नगररचना विभाग ने 49 मामलों से संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद लेआउट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद भी इस प्रकरण में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई जारी है।

मनपा की तिजोरी पर भी असर

निर्माण क्षेत्र में मंदी का असर केवल बिल्डर या विकासक तक सीमित नहीं रहेगा। नए प्रोजेक्ट कम होने पर मनपा को मिलने वाला विकास शुल्क, निर्माण अनुमति शुल्क, प्रीमियम, टीडीआर-एफएसआई से संबंधित शुल्क तथा अन्य राजस्व भी घट सकता है।

एक ओर शहर के विकास कार्यों के लिए अधिक निधि की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत निर्माण क्षेत्र की गति धीमी होने की स्थिति बन गई है। इसका असर वास्तुविशारद, इंजीनियर, ठेकेदार, निर्माण श्रमिक, स्टील-सिमेंट विक्रेता, हार्डवेयर व्यवसायी, रियल एस्टेट एजेंट तथा निर्माण क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों पर भी पड़ सकता है।

एलआईजी और ईडब्ल्यूएस नीति की

आर्किटेक्ट विजय सानप ने कहा कि पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा नासिक म्हाडा से संबंधित नियमों में किए गए बदलावों के कारण भी निर्माण व्यवसायियों में असमंजस की स्थिति है। नए नियमों को लागू करने की प्रक्रिया और उस पर प्राप्त सुझाव एवं आपत्तियों के निपटारे तक कुछ प्रोजेक्ट की मंजूरी प्रक्रिया प्रभावित होने की बात निर्माण क्षेत्र से जुड़े सूत्रों द्वारा कही जा रही है।

इसके साथ ही टीडीआर के नियमों में 50:50 की नई व्यवस्था आने से छोटे प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। छोटे प्रोजेक्ट कम होने पर इसका असर निर्माण क्षेत्र के साथ-साथ महापालिका को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ सकता है।

नगररचना के उपसंचालक रितेश चव्हाण का कहना है कि म्हाडा प्रकरण के बाद मनपा के पास बड़े प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए बहुत कम आए थे। हालांकि, अब धीरे-धीरे नए प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए आने लगे हैं और इनकी संख्या भी बढ़ रही है। कुछ समय के लिए अंतर जरूर पड़ा था, लेकिन अब नियमित रूप से काम शुरू है।

प्रशासन अपनी स्थिति करे स्पष्ट

म्हाडा प्रकरण में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। लेकिन इसका असर पूरे निर्माण क्षेत्र पर न पड़े, इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की भी है। नासिक मनपा को नियमों और मंजूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता लाने के साथ ही निर्माण व्यवसायियों की शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रभावी संवाद शुरू करना चाहिए। नासिक का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में नए आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट पर लंबे समय तक ब्रेक लगना चिंता की बात है।

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