Nashik-Trimbakeshwar Kushavarta Kund pollution: पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पावन अवसर पर ज्योतिर्लिंग नगरी त्र्यंबकेश्वर में देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। इस भारी भीड़ के बीच त्र्यंबकेश्वर के ऐतिहासिक और पवित्र कुशावर्त कुंड की स्वच्छता को लेकर त्र्यंबकेश्वर नगर परिषद प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अधिक मास के स्नान के लिए उमड़ी भीड़ के कारण कुशावर्त कुंड का पानी पूरी तरह से काला पड़ गया है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और साधु-संतों में भारी आक्रोश है। भीषण अस्वच्छता और पानी के काले होने के बावजूद श्रद्धालु बेहद श्रद्धा के साथ इस पवित्र तीर्थ में स्नान कर रहे हैं।
अधिक मास के विशेष महत्व के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं यहां 'धोंडा स्नान' के लिए पहुंच रही हैं। महिलाएं तीर्थ में दीपदान कर रही हैं और जल में दीये प्रवाहित कर रही हैं, लेकिन इतने महत्वपूर्ण पर्व पर भी कुशावर्त तीर्थ के जल को साफ करने वाली कोई भी आधुनिक प्रणाली या तंत्र कार्यरत नहीं दिखाई दिया। एकादशी के महापर्व पर भी स्थिति ऐसी ही दयनीय बनी हुई थी।
स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद द्वारा हमेशा यह दावा किया जाता है कि कुशावर्त कुंड को चौबीसों घंटे स्वच्छ रखा जाता है, लेकिन यहां आए श्रद्धालुओं ने प्रशासन के इन दावों की पोल खोलते हुए सीधे आरोप लगाया कि कुंड की सफाई केवल तभी की जाती है जब कोई मंत्री या बड़े अधिकारी दौरे पर आते हैं। आम जनता और दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए प्रशासन उदासीन बना हुआ है।
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देर रात तक श्रद्धालुओं का आना जारी रहता है, जिसे ध्यान में रखते हुए तीर्थ की दिन में कई बार सफाई की जानी चाहिए थी, लेकिन वहां केवल चारों तरफ दुर्गंध फैली हुई है। आगामी कुंभ मेले के मद्देनजर उज्जैन से होते हुए त्र्यंबकेश्वर पहुंचे जूना अखाड़े के 51 प्रमुख साधु-संतों ने तीर्थ की दुर्दशा, काला पानी और चारों तरफ फैली अस्वच्छता को देखकर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है। श्रद्धालुओं और संतों ने मांग की है कि कुंभ नगरी की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए नगर परिषद प्रशासन तुरंत कुशावर्त कुंड की युद्ध स्तर पर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करें।