

Supreme Court Suo Moto Action Digital Arrest: डिजिटल अरेस्ट के जरिए देश में बढ़ रही साइबर ठगी पर भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। लंदन में 43वें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ किया कि भारतीय न्यायपालिका नए दौर के अपराधों से निपटने के लिए संसद के कानून का इंतजार नहीं कर रही है और बेहद सक्रियता से कदम उठा रही है।
सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर धोखाधड़ी का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। इस अपराध में ठग वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, जज या सरकारी अफसर बताकर लोगों को डराते हैं और पैसे ऐंठते हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को इस खतरे की व्यापकता का आकलन करने और इसके लिए कठोर दंड वाला एक अलग कानूनी प्रावधान बनाने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता और हैरानी जताई है कि इस ठगी का शिकार अधिकतर पढ़े-लिखे लोग हो रहे हैं। सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान एक दुखद घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बुजुर्ग महिला से डराकर उनकी जीवनभर की पूरी पेंशन और बचत ठग ली गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जालसाजों ने अब तक इस ठगी के जरिए लगभग ₹2,500 करोड़ लूटे हैं।
नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट की शिकायतों में कमी आई है। साल 2024 में जहां 1,23,672 शिकायतें थीं, वहीं 2025 में यह घटकर 58,239 और जून 2026 तक 16,377 रह गई हैं। इसके बावजूद, सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी। मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस वायरस को रोकने के लिए निरंतर निगरानी बेहद आवश्यक है।
ठगी को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट संदिग्ध ऑडियो-वीडियो कॉल को तुरंत रोकने के लिए एक समय-आधारित 'किल स्विच' तंत्र पर विचार कर रही है। साथ ही, मनी रेस्टोरेशन पोर्टल के जरिए अब तक 36,290 मामलों में पीड़ितों के लगभग ₹18।05 करोड़ वापस दिलाए जा चुके हैं। इस बड़े रैकेट को ध्वस्त करने के लिए CBI ने भी 10 मामले दर्ज कर देश के 16 राज्यों में 93 स्थानों पर छापेमारी की है, जिसमें ₹80 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है।