Nashik Drought Crop Damage Survey: खरीफ 2026 में सूखे के ट्रिगर-1 के बाद नासिक जिले की 10 सूखाग्रस्त तहसीलों में फसल नुकसान के पंचनामे की रफ्तार धीमी है। 1,339 प्रभावित गांवों में केवल 60 गांवों का पंचनामा पूरा हुआ है। 5.60 लाख प्रभावित खाताधारक किसानों में से सिर्फ 10,155 की जांच पूरी हुई है।
नासिक, खरीफ सीजन 2026 में सूखे के पहले चरण का 'ट्रिगर-1' लागू होने के बाद नासिक जिले की 10 सूखाग्रस्त तहसीलों में फसल नुकसान के पंचनामे की गति बेहद धीमी बनी हुई है। जिले के 1,339 प्रभावित गांवों में से अब तक केवल 60 गांवों में पंचनामा कार्य पूरा हुआ है। इससे किसानों को मिलने वाली सरकारी राहत में और देरी होने की आशंका बढ़ गई है।
राज्य सरकार ने 26 सितंबर को बागलाण, मालेगांव, नांदगांव, देवला, कलवण, सुरगाणा, इगतपुरी, पेठ, सिन्नर और येवला तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया था। इसके बाद जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने संबंधित अधिकारियों को पंचनामा कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे।
इन 10 तहसीलों में खरीफ फसलों की कुल 5 लाख 92 हजार 696 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई है। इसमें करीब 5 लाख 60 हजार 960 खाताधारक किसान प्रभावित बताए गए हैं।
अब तक सिर्फ 60 गांवों में पंचनामा पूरा हुआ है। कुल प्रभावित क्षेत्र में से केवल 4,803 हेक्टेयर का सर्वे किया गया है, जबकि 10,155 खाताधारकों के पंचनामे पूरे हुए हैं। यानी प्रभावित क्षेत्र के महज करीब 1.43 प्रतिशत और प्रभावित खाताधारकों के करीब 3 प्रतिशत का ही काम पूरा हो पाया है।
पंचनामा कार्य की गति तहसीलवार अलग-अलग है। इगतपुरी के 126 गांवों में सिर्फ एक गांव का पंचनामा पूरा हुआ है, यानी करीब 0.79 प्रतिशत काम हुआ है। सुरगाणा में 119 में से 2 गांवों का काम पूरा हुआ, जो करीब 1.05 प्रतिशत है।
पेठ के 146 गांवों में केवल 2 गांवों, सिन्नर के 131 में से 4 और कलवण के 152 में से 5 गांवों में पंचनामा पूरा हुआ है। इन क्षेत्रों में काम की गति बेहद धीमी बनी हुई है।
दूसरी ओर देवला और येवला में पंचनामा कार्य अपेक्षाकृत तेज है। देवला में 9 गांवों में करीब 17.57 प्रतिशत, जबकि येवला में 10 गांवों में 8.06 प्रतिशत पंचनामा पूरा होने की जानकारी है।
सूखे के कारण फसलों को हुए नुकसान के बीच पंचनामा कार्य की धीमी गति किसानों की चिंता बढ़ा रही है। पंचनामा पूरा होने के बाद ही नुकसान के आधार पर सरकारी सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में किसानों को राहत राशि मिलने में देरी की आशंका है।
किसानों ने प्रशासन से पंचनामा कार्य में तेजी लाने और नुकसान का सर्वे जल्द पूरा कर सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।