Nashik District Planning Committee, (सोर्सः सोशल मीडिया) 
नासिक

नासिक: जिला नियोजन निधि ‘सरेंडर’ न हो, कार्य समयसीमा में पूर्ण करें; आयुष प्रसाद के सख्त निर्देश

जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने जिला वार्षिक योजना की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि विकास कार्यों की निधि वापस न जाए और फंड की कमी होने पर 5 दिनों में अतिरिक्त प्रस्ताव भेजें।

रूपम सिंह

Nashik District Planning Committee: नासिक जिला नियोजन समिति द्वारा मंजूर की गई योजनाओं के लिए आवंटित निधि का पूर्ण और प्रभावी उपयोग होना अनिवार्य है। जिला वार्षिक योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों को समयसीमा के भीतर पूरा करें और यह सुनिश्चित करें कि आवंटित कोष समर्पित (सरेंडर) न हो। यह निर्देश जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने दिए। वे जिलाधिकारी कार्यालय के केंद्रीय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।

नियोजन विभाग के नियमों का कड़ाई से हो पालन जिलाधिकारी प्रसाद ने कहा कि शासन के नियोजन विभाग द्वारा 1 अगस्त 2025 को जारी निर्णय के अनुसार, नासिक जिला वार्षिक योजना के तहत उपलब्ध निधि का कुशल उपयोग करना अनिवार्य है। फंड के अभाव में काम रुकना या खर्च न होने के कारण पैसा वापस शासन को जाना प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे कार्यों के कार्यान्वयन में तेजी लाएं और नियोजनबद्ध तरीके से कार्यवाही करें। साथ ही, लंबित कार्यों की वर्तमान स्थिति की जांच कर उन्हें जल्द पूरा करने पर जोर दें।

परियोजनाओं के लिए निधि नहीं पड़ेगी कम

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और स्तर के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए, यदि किसी परियोजना के लिए निधि कम पड़ रही है, तो आवश्यक अतिरिक्त निधि (स्पिल) के पूर्ण प्रस्ताव अगले 4 से 5 दिनों के भीतर प्रस्तुत करें। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही इस संबंध में पुनः समीक्षा की जाएगी।

मुख्य चर्चा के बिंदु

  • लंबित प्रशासनिक स्वीकृतियां और आवंटित निधि का वास्तविक व्यय।
  • स्वीकृत कार्यों की वर्तमान प्रगति की समीक्षा।
  • अपूर्ण कार्यों के लिए आवश्यक अतिरिक्त वित्तीय प्रस्ताव।
  • खर्च न हो पाने वाली शेष निधि के कारणों पर वचर्चा।

बैठक में ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर सहायक जिलाधिकारी अर्पिता दुबे, पशुपालन उपायुक्त प्रशांत धर्माधिकारी, नासिक जिला नियोजन अधिकारी विजय शिंदे, जिला खेल अधिकारी सुनंदा पाटिल और वन विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सभी विभागों ने अपने पास लंबित कार्यों, अब तक हुए व्यय और शेष राशि का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया है।

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