Nashik Jail Officials Party with Prisoner: महाराष्ट्र की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली नासिक सेंट्रल जेल के भीतर और बाहर कैदियों को मिलने वाले वीआईपी ट्रीटमेंट (VIP Treatment) की पोल इस वायरल वीडियो ने खोल दी है। जेल के नियम-कायदों को ताक पर रखकर कैदी और जेल के रक्षक ही जब एक साथ पार्टी करने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। वायरल हो रहे वीडियो में नासिक जेल के तीन प्रमुख वर्दीधारी अधिकारी, हीरालाल भामरे, अशोक मालवाड़ और जगदीश धूमने, शहर के नामचीन जालसाज और कैदी गौरव मिश्रा के साथ बेहद दोस्ताना अंदाज में पार्टी का लुत्फ उठाते नजर आ रहे हैं।
यह वीडियो कब शूट किया गया था, इसकी सटीक तारीख अभी सामने नहीं आई है, लेकिन केंद्रीय जेल प्रशासन ने मामले की प्राथमिक जांच रिपोर्ट तैयार कर मुंबई स्थित वरिष्ठ जेल महानिदेशक (DG Prisons) कार्यालय को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, जेलर और प्रहरियों के स्तर पर कैदियों को ऐसी निजी सुविधाएं देने के बदले मोटी रकम के लेन-देन का अंदेशा है, जिसकी अब गहनता से विभागीय जांच की जा रही है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में खड़ा गौरव मिश्रा कोई साधारण अपराधी नहीं है। साल 2024 में नासिक के अंबड पुलिस स्टेशन (Ambad Police Station) में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का एक बड़ा मामला दर्ज किया गया था। गौरव मिश्रा पर आरोप था कि वह खुद को एक फर्जी आईपीएस अधिकारी बताता था और रौब झाड़ने के लिए बाकायदा पुलिस सुरक्षा (Police Escort) के साथ लाल बत्ती लगी गाड़ी में शहर भर में घूमता था। इस हाई-प्रोफाइल ठगी के भंडाफोड़ के बाद उसे गिरफ्तार कर नासिक जेल भेजा गया था, जहां से 21 नवंबर 2024 को उसे सशर्त जमानत मिली थी।
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एक ठग और वर्दी का अपमान करने वाले अपराधी के साथ खुद असली पुलिस और जेल अधिकारियों का ऐसा दोस्ताना रवैया देखकर नासिक पुलिस के आला अधिकारी भी सख्ते में हैं। वीडियो वायरल होने के बाद नासिक के स्थानीय पुलिस स्टेशन में भी नियमों के उल्लंघन को लेकर एक नई शिकायत दर्ज कराई गई है। जांच इस बात की भी हो रही है कि क्या गौरव मिश्रा जब जेल की कस्टडी में था, तब उसे नियमों के विपरीत जाकर जेल से बाहर लाकर सरकारी आवासों पर ऐसी वीआईपी पार्टियां दी जाती थीं?
जेल अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में तीनों अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई है। अगर हीरालाल भामरे, अशोक मालवाड़ और जगदीश धूमने अगले 7 दिनों के भीतर अपनी बेगुनाही के पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें सेवा से निलंबित (Suspend) कर दिया जाएगा और उनके खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज हो सकता है। इस घटना ने एक बार फिर महाराष्ट्र के कारागारों की सुरक्षा और वहां व्याप्त भ्रष्टाचार के पुराने जिन्न को बाहर निकाल दिया है।