

Jalgaon Jamod Father Kills 4 Children: बुलढाणा जिले के आदिवासी बहुल और ग्रामीण अंचल वाले जलगांव-जामोद तालुका के भले अंजन गांव में रहने वाले किराडिया परिवार की खुशियां इस कदर मातम में बदल जाएंगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। मृतक विजय मूसा किराडिया (उम्र 35 वर्ष) खेती और मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। लेकिन पिछले कुछ समय से पति-पत्नी के बीच लगातार छोटे-मोटे विवाद और आर्थिक तंगी के कारण तनाव का माहौल बना हुआ था।
घटनाक्रम के अनुसार, बीती रात भी पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक हुई, जिससे नाराज होकर पत्नी घर छोड़कर पास ही स्थित अपने मायके चली गई थी। सोमवार (25 मई) की सुबह जब विजय घर का काम अकेले कर रहा था, तब उसके बुजुर्ग पिता ने उससे पूछ लिया, "तुम अकेले क्यों काम कर रहे हो, तुम्हारी पत्नी कहां गई है...?" पिता के इस साधारण से सवाल ने विजय के भीतर दबे गुस्से और हताशा को इस कदर भड़का दिया कि उसने एक खौफनाक और आत्मघाती साजिश रच डाली।
विजय सुबह अपने चारों बच्चों, प्रीत किराडिया, प्राची किराडिया, पूर्वी किराडिया और पीयूष किराडिया को साथ लेकर घर से निकला। रास्ते में राजुरा बांध क्षेत्र के पास एक सुनसान खेत में बने गहरे कुएं को देखकर वह वहां रुक गया। मासूम बच्चों को जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनका सगा पिता ही उनकी जान लेने पर आमादा है। विजय ने एक-एक करके अपने चारों बच्चों को कुएं के भीतर धकेल दिया। बच्चों के पानी में डूबने के बाद, उसने खुद भी कुएं में छलांग लगा दी।
दोपहर के समय जब राजुरा बांध क्षेत्र से गुजर रहे कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने कुएं के पानी में शवों को तैरते हुए देखा, तो उनके होश उड़ गए। घटना की जानकारी तुरंत जलगांव जामोद पुलिस स्टेशन को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। कुएं से जब एक के बाद एक पांच शव बाहर निकाले गए, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। मृतकों में सबसे छोटे बच्चे की उम्र महज कुछ ही साल बताई जा रही है।
पुलिस ने पांचों शवों को कब्जे में लेकर जलगांव-जामोद के ग्रामीण अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। जलगांव-जामोद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला गहरे मानसिक अवसाद, आर्थिक तंगी और गंभीर घरेलू कलह का परिणाम नजर आ रहा है। पुलिस ने विजय के पिता, पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। इस दुखद घटना ने ग्रामीण इलाकों में परिवारों के भीतर बढ़ते मानसिक तनाव और काउंसलिंग (परामर्श) की कमी के गंभीर मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है।