BJP city president controversy (सोर्सः सोशल मीडिया) 
नासिक

भाजपा महानगर अध्यक्ष सुनील केदार ने इस्तीफा लिया वापस, महापौर चयन पर नाराजगी के बाद मान-मनौव्वल

Sunil Kedar Resignation: नासिक में महापौर चयन को लेकर नाराज भाजपा महानगर अध्यक्ष सुनील केदार ने पार्टी नेतृत्व के आश्वासन के बाद अपना इस्तीफा वापस ले लिया।

आंचल लोखंडे

BJP Nashik Politics: महापौर और उपमहापौर पद के चयन में विश्वास में न लिए जाने से नाराज होकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपने वाले भाजपा महानगर अध्यक्ष सुनील केदार ने कुछ ही घंटों के भीतर अपना फैसला बदल लिया है। केदार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश भाजपा नेतृत्व द्वारा उनकी गलतफहमियां दूर किए जाने के बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लेने का निर्णय लिया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी नेतृत्व ने केदार को यह आश्वासन दिया है कि नगर निगम से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पदों के चयन में उन्हें पूरी तरह विश्वास में लिया जाएगा। भाजपा के ही कुछ नेताओं का मानना है कि इस इस्तीफे के माध्यम से केदार ने प्रभारी मंत्री गिरीश महाजन पर संगठनात्मक दबाव बनाते हुए अपनी राजनीतिक अहमियत को उजागर किया है।

नामों की घोषणा से बढ़ा था विवाद

मनपा चुनाव में भाजपा को मिली भारी सफलता के बाद स्थानीय विधायक और महानगर अध्यक्ष अपने-अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को सत्ता के पदों पर आसीन देखना चाहते थे। लेकिन मंगलवार, 3 फरवरी को नवनिर्वाचित पार्षदों की बैठक में मंत्री गिरीश महाजन ने सीधे महापौर और उपमहापौर पद के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी।

नेतृत्व के आश्वासन पर बदला फैसला

केदार का आरोप था कि पार्टी की आंतरिक बैठकों में जिन नामों पर सहमति बनी थी, वे घोषित नामों से अलग थे। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने तत्काल आलाकमान को इस्तीफा भेजते हुए कहा था कि यदि वे निष्ठावान कार्यकर्ताओं को न्याय नहीं दिला सकते, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

महाजन और केदार के बीच संवादहीनता बनी विवाद की जड़

सूत्रों के अनुसार, चुनाव परिणामों के बाद से ही मंत्री गिरीश महाजन और सुनील केदार के बीच मतभेद गहराने लगे थे। जहां महाजन ने ‘एकला चलो’ की नीति अपनाते हुए भाजपा की अकेले सत्ता स्थापना की घोषणा की, वहीं केदार ने शिवसेना (शिंदे गुट) को महायुति सरकार में शामिल करने का सुझाव दिया था।

डैमेज कंट्रोल की कोशिश की

बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, केदार की मौजूदगी में ही मंत्री महाजन ने स्पष्ट कर दिया था कि भाजपा को किसी के समर्थन की आवश्यकता नहीं है और ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है। इन विरोधाभासी बयानों ने दोनों नेताओं के बीच बढ़ती दूरी को सार्वजनिक कर दिया था। फिलहाल, इस्तीफे की वापसी के बाद पार्टी ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश जरूर की है, लेकिन संगठन के भीतर की खींचतान पूरी तरह समाप्त हुई है या नहीं, इस पर सवाल अब भी बने हुए हैं।

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