Nashik Monsoon Igatpuri Kharif Crop Update: जून का महीना समापन की ओर है, लेकिन नासिक जिले में मानसून ने लंबी चुप्पी साध ली है, जिससे अन्नदाता की चिंताएं बढ़ गई हैं। जिले के त्र्यंबकेश्वर और इगतपुरी जैसे भारी बारिश वाले क्षेत्रों में पिछले तीन-चार दिनों से मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है। चिलचिलाती धूप और उमस के कारण खरीफ की फसलों के सूखने का खतरा उत्पन्न हो गया है। जिले में मानसून की शुरुआत निराशाजनक रही है।
पिछले 72 घंटों से जिले के कई हिस्सों में बारिश की एक बूंद तक नहीं गिरी है। इससे उन किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं जिन्होंने शुरुआती फुहारों को देखकर उत्साह में धान, नागली और अन्य खरीफ फसलों की बुआई कर दी थी।
खेतों में बीज अंकुरित तो हो गए है, लेकिन उन्हें जीवित रहने के लिए अब नियमित नमी की सख्त आवश्यकता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 48 से 72 घंटों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसानों को 'दोबारा बुआई' करनी पड़ेगी, जिससे उन पर लागत का दोगुना आर्थिक बोझ पड़ेगा।
प्रकृति की इस बेरुखी और सूखे जैसे हालातों को देखते हुए नासिक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अब धार्मिक अनुष्ठानों का सहारा लिया जा रहा है। त्र्यंबकेश्वर तहसील के कई गांवों में किसान संगठनों ने अच्छी बारिश की कामना के लिए 'पर्जन्य याग' आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। किसानों का कहना है कि जब वैज्ञानिक पूर्वानुमान फेल हो रहे हैं, तब अब केवल ईश्वर की कृपा ही उनकी मेहनत को बचा सकती है।
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