नासिक जिले के बांधों में पानी घटकर केवल 20% रहा, दारणा समूह सबसे कमजोर जबकि नांदूरमध्यमेश्वर में 98% जल भंडारण

Nashik Water Crisis: नासिक जिले में मानसून की धीमी रफ्तार से 26 प्रमुख बांधों में जल भंडारण घटकर 20.11% रह गया है। दारणा समूह में स्थिति सबसे चिंताजनक है, जबकि नांदूरमध्यमेश्वर में 98% पानी है।
Due to a delayed monsoon, water storage in Nashik's 26 major dams has dropped to 20.11%. The Darna group is the lowest, while Nandur Madhameshwar stands at 98%.
नासिक जिले के बांध (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Dam Water Level: नासिक जिले में मानसून की धीमी रफ्तार का असर अब जलस्रोतों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। 26 जून 2026 की जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले के 26 प्रमुख और मध्यम श्रेणी के बांधों में उपयोगी जल भंडारण घटकर केवल 20.11 प्रतिशत (14,205 मिलियन घनफुट) रह गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 38.87 प्रतिशत (27,452 मिलियन घनफुट) था। जल भंडारण में आई इस बड़ी गिरावट ने आगामी महीनों के लिए चिंता बढ़ा दी है।

गंगापुर बांध समूह की स्थिति सबसे बेहतर

जिले के बांध समूहों में गंगापुर समूह अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है, जहां कुल जल भंडारण 36.05 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इस समूह में गंगापुर बांध में 31.83 प्रतिशत, कश्यपी में 23.87 प्रतिशत, गौतमी गोदावरी में 74.25 प्रतिशत और आलंदी बांध में 5.39 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।

गिरणा घाटी में संतोषजनक, दारणा समूह सबसे कमजोर

गिरणा घाटी बांध समूह में कुल जल भंडारण 25.20 प्रतिशत है। गिरणा बांध में 23.71 प्रतिशत, चणकापूर में 30.90 प्रतिशत, हरणबारी में 34.48 प्रतिशत और केळझर में 45.10 प्रतिशत जल उपलब्ध है। वहीं पालखेड बांध समूह का जल भंडारण केवल 12.65 प्रतिशत है, जहां करंजवण में 16.31 प्रतिशत, वाघाड में मात्र 1.09 प्रतिशत और पालखेड में 23.28 प्रतिशत पानी दर्ज किया गया है।

सबसे चिंताजनक स्थिति दारणा बांध समूह की है, जहां कुल जल भंडारण केवल 12.85 प्रतिशत है। दारणा बांध में 7.16 प्रतिशत, मुकणे में 19.04 प्रतिशत, कडवा में 16.53 प्रतिशत और भाम बांध में महज 0.65 प्रतिशत पानी बचा है।

नांदूरमध्यमेश्वर बना अपवाद

नासिक जिले के अधिकांश बांधों में जलस्तर कम होने के बीच नांदूरमध्यमेश्वर बांध एक सकारात्मक अपवाद के रूप में सामने आया है। इस बांध में 98.44 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया है, जो जिले में सबसे अधिक है।

अच्छी बारिश पर टिकी उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून सामान्य या अच्छी बारिश नहीं देता है, तो जिले में जलापूर्ति और सिंचाई पर दबाव बढ़ सकता है। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए है और आगामी वर्षा पर ही जलसंकट की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।

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