नासिक विधान परिषद (सोर्स - फोटो नवभारत) 
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नासिक विधान परिषद चुनाव: निर्दलीय गोकुल गिते के मैदान में डटे रहने से मुकाबला हुआ त्रिकोणीय, बढ़ी हलचल

Nasik MLC Election: नासिक विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय गोकुल गिते के डटे रहने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। महायुति की मान-मनौव्वल के बाद भी गिते ने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं।

रूपम सिंह

Nashik MLC Election Narendra Darade Shiv Sena: नासिक स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गिते की भूमिका ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। जहां एक ओर महायुति और अन्य दल चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं गिते की लगातार सक्रियता ने चुनाव को बेहद रोचक और कांटे का बना दिया है।

गिते की बढ़ती सक्रियता और महायुति की रणनीति

मंत्री गिरीश महाजन द्वारा गोकुल गिते से हालिया मुलाकात के बावजूद, गिते ने अब तक अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के संकेत नहीं दिए' हैं। इसके विपरीत गोकुल गिते सटाणा तालुका में लगातार सक्रिय हैं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नगरसेवकों से व्यक्तिगत संपर्क साधकर समर्थन जुटा रहे हैं। नामांकन वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद भी गिते मैदान में बने हुए हैं, जिससे चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बढ़ गई है। प्रसाद हिरे के हटने के बाद नरेंद्र दराडे को समर्थन मिलने से समीकरण तो बदले हैं, लेकिन गिते के डटे रहने से मतों के बंटवारे का खतरा बना हुआ है।

दराडे ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

शिवसेना के उम्मीदवार नरेंद्र दराडे ने मंगलवार को मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गिते को चुनाव मैदान से हटाने और उनके समर्थन को लेकर इस बैठक में चर्चा हुई, लेकिन गिते की उम्मीदवारी वापस लेने के संबंध में कोई अंतिम निर्णय हुआ है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। बैठक के बाद राजनीतिक हलकों में विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई।

दराडे खेमे की बढ़ती भागदौड़

  • दूसरी ओर, शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र दराडे का खेमा भी पूरी ताकत से जुटा है। विधायक किशोर दराडे लगातार स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के सदस्यों से संपर्क कर रहे हैं।
  • इसी सिलसिले में उनकी पूर्व स्थायी समिति सभापति गणेश गिते से हुई मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और गर्म कर दिया है।
  • चुनावी गणित पर नजर स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के नगरसेवक ही इस चुनाव के निर्णायक मतदाता हैं। चुनाव का परिणाम इन मतदाताओं के रुख पर ही निर्भर करेगा। वर्तमान स्थिति में गोकुल गिते की भूमिका 'किंगमेकर' या 'गेम चेंजर' हो सकती है।
  • पूरे जिले की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या गिते चुनाव के अंत तक मैदान में बने रहेंगे या मतदान से पहले कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आएगा।

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