नाशिक: अंबड पुलिस स्टेशन क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर एक कारोबारी से 1 करोड़ से ज्यादा की ठगी की घटना घटी है। सामने आया है कि आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र दिखाकर और फर्जी रेलवे टेंडर दिलाने का लालच देकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
इतना ही नहीं, चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई है कि आरोपियों ने पीड़ित कारोबारियों को रिवॉल्वर से धमकाया और रंगदारी मांगी। पुलिस के मुताबिक विट्ठल सखाराम वाकडे (56), ट्रांसपोर्ट व्यवसायिक, निवासी श्रीजी बंगला नं. 57, पाणिनि सोसायटी के पीछे, वसंत नगर, राणे नगर, नाशिक ने अंबड पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत की।
शिकायत में कहा है कि आरोपी गौरव रामअवतार मिश्रा (37), निवासी मिश्रा हाउस, महालक्ष्मी नगर, कामठवाडे, अंबड लिंक रोड, नाशिक ने उन्हें 2018 में आरोपी मिश्रा ने खुद को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी बताया। वह हमेशा पुलिस की वर्दी पहने रहता था, लाल और नीली बत्ती लगी कार में चलता था। उसने दिखाया कि उसके पास सरकार द्वारा मुहैया कराया गया सुरक्षा गार्ड है यह बताकर वाकडे का भरोसा जीत लिया। मिश्रा ने वाकडे को फर्जी रेलवे टेंडर दिलाने का लालच देकर समय-समय पर उससे पैसे वसूले। वाकड़े मिश्रा के भरोसे से अभिभूत हो गए और उन्हें कुल 1 करोड़ 7 लाख 88 हजार 106 रुपये दे दिए।
इसमें रेलवे डिपो में ट्रेनों की आपूर्ति, सुरक्षा जमा, ट्रेनों की लागत जैसे विभिन्न कारणों से पैसा दिया गया था। लेकिन समय के साथ वाकडे को मिश्रा की जालसाजी का पता चल गया। जब उन्होंने मिश्रा से पैसे वापस मांगे तो वह टालमटोल करने लगा।
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13 अक्टूबर को मिश्रा वाकडे को आगरा होटल, पाथर्डी फाटा, नाशिक में मिलने के लिए बुलाया गया। मिश्रा वहां 10-12 गुंडों को लेकर आया। वाकडे को रिवॉल्वर दिखाकर धमकाया गया। उसने वाकडे को पैसे भूल जाने के लिए कहा। साथ ही उनसे प्रति माह 5 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की।
वाकडे को पता चला कि मिश्रा के खिलाफ इंदिरानगर थाने में जालसाजी का मामला दर्ज है। इसके बाद उन्होंने हिम्मत दिखाई और अंबड पुलिस स्टेशन पहुंचे और मिश्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मिश्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (विश्वासघात), 384 (जबरन वसूली), 506 (धमकी) और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
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