नासिक जिला न्यायालय, नो पार्किंग,(फोटो: नवभारत डिजाइन फोटो) 
नासिक

न्याय के मंदिर में ही कानून की धज्जियां! नासिक जिला न्यायालय परिसर में 'नो पार्किंग' के बोर्ड बने शोपीस

Nashik District Court No Parking: नासिक जिला न्यायालय परिसर में 'नो पार्किंग' नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए लगाए गए बोर्ड महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

अंकिता पटेल

Nashik District Court No Parking Rule Violation: नासिक जहां कानून का पाठ पढ़ाया जाता है और न्याय के फैसले सुनाए जाते हैं, उसी नासिक जिला न्यायालय परिसर में कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हैरत की बात यह है कि इस नियम उल्लंघन में शामिल लोग अनपढ़ नहीं, बल्कि समाज का अत्यधिक शिक्षित और प्रबुद्ध वर्ग है। न्यायालय परिसर में सुरक्षा और सुव्यवस्था के लिए लगाए गए 'नो पार्किंग' बोर्ड अब महज शोपीस बनकर रह गए हैं।

'नो पार्किंग' बोर्ड के नीचे ही खड़े हो रहे वाहन

प्रशासन द्वारा यातायात को सुचारू रखने के लिए परिसर में जगह-जगह 'नो पार्किंग' के बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन वकील, वादी-प्रतिवादी और अन्य शिक्षित लोग इन बो के ठीक सामने ही अपने वाहनों को बेतरतीब खड़ा कर रहे हैं।

इसके कारण न्यायालय परिसर के भीतर वाहनों की लंबी कतारों के कारण आम नागरिकों और विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों व महिलाओं को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग द्वारा ही कानून का ऐसा उल्लंघन न्याय व्यवस्था के प्रति एक गलत संदेश दे रहा है।

नागरिकों में बढ़ता असंतोष

न्यायालय में आने वाले आम नागरिकों ने इस स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब न्याय के मंदिर में ही अनुशासन का अभाव होगा, तो आम आदमी व्यवस्था पर भरोसा कैसे करेगा?

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने अब न्यायालय प्रशासन और यातायात पुलिस से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगे हैं- नो पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करने वाले चाहे कितने भी प्रभावशाली या शिक्षित क्यों न हों, उन पर सख्त जुर्माना लगाया जाए।

परिसर में ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए विशेष पुलिस बल तैनात किया जाए ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। न्याय के मंदिर की मर्यादा बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, जिसे तत्काल प्रभावी ढंग से पूरा किया जाना चाहिए।

एल्गार कष्टकरी संगठन, संस्थापक अध्यक्ष, भगवान मधे ने कहा जिस जगह पर न्याय देने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। अगर उसी पवित्र स्थान पर कानून का सरेआम उल्लंघन होने लगे, तो आम नागरिकों को न्याय और व्यवस्था पर कैसे भरोसा होगा? अगर न्याय के मंदिर में ही ऐसा माहौल रहेगा, तो देश के आम नागरिक अपनी गुहार लेकर और न्याय मांगने किसके पास जाएंगे?

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