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नासिक

बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: महाराष्ट्र के 157 अनुदानरहित कॉलेजों को मिलेगी 290 करोड़ की शुल्क प्रतिपूर्ति

Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के 157 कॉलेजों को 290 करोड़ की लंबित शुल्क प्रतिपूर्ति 31 अक्टूबर 2026 तक चुकाने का आदेश दिया है, जिससे शिक्षण संस्थाओं को बड़ी राहत मिली है।

रूपम सिंह

Nashik Education News: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के निजी अनुदानरहित इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक तथा कृषि एवं कृषि संलग्न महाविद्यालयों को बड़ी राहत देते हुए शैक्षणिक वर्ष 2011-12 से 2025-26 तक की लंबित शुल्क प्रतिपूर्ति राशि जारी करने का महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को 157 अनुदानरहित महाविद्यालयों की करीब 290 करोड़ रुपये की लंबित राशि 31 अक्टूबर 2026 से पहले अदा करने के निर्देश दिए हैं।

यह निर्णय न्यायमूर्ति आर।आई छागला और न्यायमूर्ति अद्वैत एम। सेथना की खंडपीठ ने 15 अप्रैल 2026, 23 अप्रैल 2026 और 6 मई 2026 को सुनाया। यह जानकारी अनुदानरहित इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक तथा कृषि एवं कृषि संलग्न महाविद्यालयों की एसोसिएशन के अध्यक्ष समीर वालासाहब वाघ ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।

समिति की रिपोर्ट पर कोर्ट का निर्णय : हाईकोर्ट में शुल्क प्रतिपूर्ति से संबंधित 25 याचिकाएं लंबित थीं। अदालत ने 1 नवंबर 2023 को टिप्पणी करते हुए कहा

था कि महाविद्यालयों को समय पर शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिलने से अनेक संस्थाएं परेशान हैं। इसके बाद अदालत ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को लंबित राशि शीघ्र जारी करने और याचिकाओं की संख्या कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया था।

इसके बाद महाराष्ट्र सरकार के तत्कालीन उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव डॉ. वकासचंद रस्तोगी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई। तकनीकी शिक्षा संचालनालय के निदेशक डॉ. विनोद मोहितकर ने शुल्क प्रतिपूर्ति से जुड़े सभी विभागों की 3 बैठकें आयोजित कर हाईकोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत की। अदालत ने उसी रिपोर्ट के आधार पर यह आदेश पारित किया।

कार्रवाई की रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने के आदेश

अदालत ने निर्देश दिया है कि संबंधित सभी विभाग, 157 याचिकाकर्ता महाविद्यालयों की सुनवाई 5 महीने के भीतर पूरी करें और लंबित राशि की जांच कर सत्यापन के बाद चार सप्ताह के भीतर संबंधित संस्थानों को भुगतान करें। इस मामले में महाराष्ट्र सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग, आदिवासी विकास विभाग, अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण विभाग तथा महाराष्ट्र कृषी शिक्षण और संशोधन परिषद सहित कुल 6 विभाग शामिल है।

साथ ही महा-डीबीटी पोर्टल सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन होने के कारण उसे भी निर्देश जारी किए गए है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि 157 कॉलेजों की लंबित राशि के भुगतान को लेकर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 1 अक्टूबर 2026 से पहले अदालत में प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

न्यायालय के निर्णय का किया स्वागत

  • हाईकोर्ट के इस निर्णय का स्वागत समीर बालासाहेब वाध, शेखर गोविंदराव निकम्, डॉ. शशिकांत आण्णाराव हलकुडे, अमित नितीन कोल्हे, अनिल धमाजी मेहेर,
  • डॉ. अनिल वसंत खर्चे, अनिल कुमार सुरजित सिंग गुप्ता, अनिल आप्पासाहेब बागणे, डॉ. प्रमोद वसंतराव पंपतवार और केएस बंदी ने किया।
  • अदालत में एसोसिएशन की ओर से प्रफुल्ल शाह, चंदना सालगांवकर, श्रीनिवास देशमुख, संदीप वाघमारे और गुंजन शाह ने पक्ष रखा।

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