नासिक की नई महापौर बनने पर हिमगौरी आहेर का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत करते मंत्री गिरीश महाजन (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नासिक

नासिक में BJP का परचम: हिमगौरी आहेर बनीं महापौर, शिवसेना के विलास शिंदे को मिला डिप्टी मेयर का पद

Nashik Mayor Election: नासिक नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने बाजी मारी है। हिमगौरी आहेर को नया महापौर चुना गया है, वहीं शिवसेना के विलास शिंदे उप-महापौर बने हैं। बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने सबको चौंका दिया।

आकाश मसने

Himgauri Aher Adke Win Nashik Mayor Election: महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मी के बीच नासिक नगर निगम (NMC) से बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी की हिमगौरी आहेर-आडके को शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर नासिक का नया महापौर (मेयर) चुन लिया गया है। वहीं, सत्ता के समीकरणों को साधते हुए शिवसेना के विलास शिंदे को उप-महापौर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आखिरी वक्त में बदला राजनीतिक समीकरण

नासिक नगर निगम के इस चुनाव में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब बीजेपी ने रणनीतिक कदम उठाते हुए एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपने साथ लेने का फैसला किया। पहले बीजेपी की ओर से सीमा पवार भी रेस में थीं, लेकिन गठबंधन की शुचिता और सत्ता के सुचारू संचालन के लिए उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। सीमा पवार के हटने से हिमगौरी आहेर के महापौर बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।

बहुमत का गणित और दलीय स्थिति

122 सदस्यीय नासिक महानगरपालिका में भारतीय जनता पार्टी का दबदबा स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। चुनाव परिणामों और पार्षदों की संख्या पर नजर डालें तो स्थिति कुछ इस प्रकार है।

पार्टीवार पार्षदों की संख्या

  • भारतीय जनता पार्टी- 72
  • शिवसेना- 26
  • शिवसेना (UBT)- 15
  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी- 04
  • कांग्रेस- 03
  • मनसे- 01

अकेले लड़कर भी गठबंधन का साथ

गौरतलब है कि बीजेपी ने नासिक नगर निगम का चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ा था और 72 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल किया था। दूसरी ओर, शिवसेना और राकांपा ने गठबंधन में चुनाव मैदान में ताल ठोकी थी। हालांकि, मेयर चुनाव के वक्त राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बीजेपी और शिवसेना ने हाथ मिला लिया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

इस नई जीत के साथ ही हिमगौरी आहेर ने शहर के विकास का संकल्प जताया है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य नासिक की बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना और रुके हुए प्रोजेक्ट्स को गति देना है। विपक्ष, जिसमें शिवसेना (UBT) और कांग्रेस शामिल हैं, ने इस गठबंधन पर तंज कसा है, लेकिन संख्या बल बीजेपी के पक्ष में होने के कारण चुनाव प्रक्रिया निर्बाध रूप से संपन्न हुई।

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