अशोक खरात (सोर्स: एआई)
नासिक

यौन शोषण केस में अशोक खरात की मुश्किलें बढ़ीं, नासिक में पीड़ित महिलाओं का पूछताछ के दौरान फूटा गुस्सा

Ashok Kharat Case: अशोक खरात के खिलाफ यौन शोषण और आर्थिक धोखाधड़ी के आरोपों की जांच अभी चल रही है। पूछताछ के दौरान पीड़ित महिलाओं ने अशोक खरात के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया।

आलोक उमाकृष्ण

Victims Anger During Interrogation In Nashik: खुद को भगवान का रूप बताकर महिलाओं का विश्वास जीतने और फिर उनके यौन शोषण व आर्थिक धोखाधड़ी के आरोपों में घिरे अशोक खरात के खिलाफ पीड़ित महिलाओं का गुस्सा पूछताछ के दौरान सामने आ गया।

खरात के सामने आते ही कुछ महिलाओं ने मन में दबा आक्रोश जाहिर किया और सवाल किया कि जिसे हमने भगवान माना, उसी ने हमारा विश्वास तोड़ा। हमारा जीवन बर्बाद कर तुमने क्या हासिल किया? खरात पर नासिक, अहिल्यानगर और पुणे में गंभीर मामले दर्ज हैं। उसे 18 मार्च को नासिक के कर्मयोगीनगर-गोविंदनगर इलाके से हिरासत में लिया गया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है।

SIT, ED भी कर रहे पड़ताल

अशोक खरात के खिलाफ दर्ज यौन शोषण से जुड़े मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। वहीं, आर्थिक लेन-देन और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रहा है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं और कथित वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटा रही हैं।

इस बीच खरात की पत्नी के खिलाफ भी शिर्डी में जमीन से जुड़े एक मामले में कार्रवाई की गई थी। हालांकि, इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें जमानत मिल चुकी है। वहीं, खरात से जुड़े मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी है।

जमानत पर निकम का कड़ा विरोध

न्यायिक प्रक्रिया के बाद खरात की पत्नी को जमानत मिल चुकी है। वहीं, अशोक खरात ने भी जमानत के लिए आवेदन किया है। नासिक में हुई सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने खरात की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया।

उन्होंने अदालत के समक्ष सरकारी पक्ष का पक्ष रखते हुए जमानत दिए जाने पर आपत्ति जताई। मामले में अदालत की सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

निकम के विरोध से खरात की मुश्किलें बढ़ीं

यौन शोषण के मामलों में सरकारी पक्ष की ओर से उज्ज्वल निकम पैरवी कर रहे हैं। जमानत याचिका का उनके द्वारा किए गए विरोध से मामले में खरात की मुश्किले बढ़ती नजर आ रही है। हालांकि, सभी मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं और आरोपों की पुष्टि या दोष तय करने का अधिकार अदालत को ही है।

पीड़ित महिलाओं से पूछताछ के दौरान हुई कथित आमने-सामने की मुलाकात ने उनके भीतर लंबे समय से जमा आक्रोश को सामने ला दिया। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ अब पीड़ितों की शिकायतों पर अदालत में सुनवाई भी जारी है।

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