मराठवाड़ा में सिर्फ 57.78% बरसे मेघ; बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, खेतों में जाकर जांच के निर्देश

Marathwada Drought Crisis: मराठवाड़ा समेत महाराष्ट्र के कई जिलों में कम बारिश से सूखे जैसे हालात हैं। मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों को खेतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा।
Marathwada Drought Crisis 18 Districts Face Rain Shortage
मराठवाड़ा में बारिश की कमी से सूखे का संकट(सोर्स: AI)
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Marathwada Districts Face Rain Shortage: छत्रपति संभाजीनगर, पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों की फसलें, चारे की कमी और जल व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसे देखते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समूचे राज्य की स्थिति की समीक्षा की, जिसमें भयावह स्थिति सामने आई।

इस दौरान उन्हें बताया गया कि मराठवाड़ा के आठों जिलों छत्रपति संभाजीनगर, जालना, धाराशिव, बीड, लातूर, नांदेड़, परभणी, हिंगोली के अलावा वाशिम, अकोला, अमरावती, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, चंद्रपुर, नंदूरबार, अहिल्यानगर और सोलापुर समेत कुल 18 जिलों में सूखे के हालात बने हुए हैं।

इसे गंभीरता से लेते हुए मंत्री बावनकुले ने मराठवाड़ा के सभी जिलाधिकारियों, प्रांत अधिकारियों और तहसीलदारों को अपने-अपने क्षेत्रों में फसलों की मौजूदा स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर 14 सितंबर तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।

खेतों में जाकर प्रत्यक्ष निरीक्षण करें

बैठक में विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत समेत विभाग के सभी आठ जिलों के जिलाधिकारी शामिल हुए। मंत्री बावनकुले ने अधिकारियों से कहा कि केवल कार्यालयीन आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार न करें, बल्कि खेतों में जाकर प्रत्यक्ष निरीक्षण करें और फसलों की वास्तविक स्थिति का अवलोकन करें।

मराठवाड़ा संभाग में केवल 57.78% ही बरसे मेघ

समीक्षा बैठक में बताया गया कि विभाग में अब तक औसत वर्षा की तुलना में सिर्फ 57.78% ही मेघ बरसे हैं। पिछले वर्ष इसी तारीख तक 106.38% बारिश दर्ज की गई थी। विभाग में कुल 496 राजस्व मंडल है, जिनमें से सबसे अधिक 218 मंडल 50 से 75% बारिश वाली मध्यम श्रेणी में है। मराठवाड़ा क्षेत्र में सोयाबीन, कपास, तूर, हल्दी, उड़द और मूंग की फसलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

Marathwada Drought Crisis 18 Districts Face Rain Shortage
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93 % खरीफ की बुआई हो चुकी है

वहीं विदर्भ क्षेत्र में कपास, मूंग, उड़द और तूर की फसले प्रभावित हुई हैं। विशेष रूप से धाराशिव, बीड और जालना जिलों में पशुओं के लिए चारे की कमी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यदि बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में चारे का संकट और गहरा होने की आशंका जताई जा रही है।

संभाग के जलप्रकल्पों की स्थिति की समीक्षा में बताया गया कि 11 बड़ी परियोजनाओं में 66.74% पानी है। 76 मध्यम प्रकल्पों में 21.34%, जबकि 780 लघु परियोजनाओं में सिर्फ 20.48 % पानी उपलब्ध है। विभाग में औसतन 93 % क्षेत्र में खरीफ की बुआई हो चुकी है।

करीब 55.66 लाख पशुधन के लिए 1 करोड़ 7 लाख मीट्रिक टन चारा उपलब्ध होने की जानकारी बैठक में दी गई। इस वर्ष 23 अगस्त से 11 सितंबर तक लगातार करीब 20 दिनों तक वर्षा का लंबा खंड रहा है, जिसके चलते फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशका है।

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