Anna Hazare cried during Silent Protest: देश की राजधानी दिल्ली में नीट परीक्षा विवाद और पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रहे लाखों छात्रों के समर्थन में अब देश के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे भी पूरे आवेग के साथ मैदान में उतर आए हैं। महाराष्ट्र में शिरडी के वाडिया पार्क स्थित गांधी मेमोरियल में आयोजित एक 'मौन आंदोलन' में शामिल होने पहुंचे 88 वर्षीय अन्ना हजारे इस दौरान बेहद भावुक हो गए और फफक-फफक कर रो पड़े।
खराब सेहत और बढ़ती उम्र के बावजूद अन्ना हजारे छात्रों के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट करने के लिए इस मौन प्रदर्शन में शरीक हुए। हालांकि, गिरते स्वास्थ्य के कारण वे वहां कुछ ही देर रुक सके, लेकिन उनके जाने के बाद भी अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं का मौन आंदोलन जारी रहा।
जब से दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन उग्र हुआ था और पुलिसिया कार्रवाई शुरू हुई थी, तब से देश भर में यह सवाल पूछा जा रहा था कि भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलनों के ध्वजवाहक अन्ना हजारे इस पर खामोश क्यों हैं। अन्ना ने न केवल मौन प्रदर्शन में हिस्सा लेकर इन सवालों का जवाब दिया, बल्कि इससे एक दिन पहले (22 जुलाई को) उन्होंने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेहद भावुक और कड़ा पत्र भी भेजा।
अपने पत्र में अन्ना हजारे ने देश में युवाओं पर हो रही पुलिसिया कार्रवाई पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, "सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हुए छात्रों के साथ हिंसा और बर्बर पुलिस कार्रवाई की खबरें दिल को बेहद पीड़ा पहुंचाने वाली हैं।"
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अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को सलाह देते हुए पत्र में स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के आक्रोश को केवल एक 'कानून और व्यवस्था' की प्रशासनिक समस्या मानकर दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। इसे समाज की वास्तविक पीड़ा, आक्रोश और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाना चाहिए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के बारे में खुलकर बोलते हुए अन्ना ने लिखा, "यदि युवाओं के असंतोष को शांत करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा मांग लिया जाता है, तो इससे केंद्र सरकार नहीं गिर जाएगी। इसके विपरीत, सरकार की कार्यप्रणाली जनता के प्रति अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी साबित होगी।" उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह अहंकार छोड़कर प्रदर्शनकारियों की बात धैर्यपूर्वक सुने और सकारात्मक संवाद के जरिए समाधान निकाले।
पत्र लिखने के बाद संवाददाताओं से संक्षिप्त बातचीत करते हुए अन्ना हजारे ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे पत्र इसलिए लिखा क्योंकि वे देश के सर्वोच्च जनप्रतिनिधि हैं। राष्ट्र के मुखिया होने के नाते यह उनका दायित्व है कि वे युवाओं के आंसुओं और समस्याओं पर तुरंत संज्ञान लें।
अन्ना हजारे के इस भावुक और आक्रामक रुख के बाद नीट आंदोलन को एक नया नैतिक बल मिल गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अन्ना का यह हस्तक्षेप केंद्र सरकार पर छात्रों की मांगों को मानने का दबाव और अधिक बढ़ाएगा।