Ashok Kharat CDR Eknath Shinde Call (फोटो क्रेडिट-X)  
नासिक

एकनाथ शिंदे और अशोक खरात के बीच 17 बार फोन पर हुई बात! अंजलि दमानिया ने जारी किया CDR

Anjali Damania Eknath Shinde CDR: अंजलि दमानिया ने अशोक खरात के कॉल रिकॉर्ड जारी किए। सीएम शिंदे से 17 बार और रूपाली चाकणकर से 177 बार हुई बात। महाराष्ट्र की राजनीति में मचा हड़कंप।

अनिल सिंह

Ashok Kharat CDR: नासिक के जालसाज अशोक खरात के राजनीतिक कनेक्शन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने एक ऐसा बम फोड़ा है, जिसने महाराष्ट्र की सियासत में खलबली मचा दी है। दमानिया ने दावा किया है कि इस भोंदूबाबा के तार सीधे राज्य के बड़े सत्ताधीशों से जुड़े हुए थे। उन्होंने बाकायदा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का हवाला देते हुए बताया कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अशोक खरात के बीच कई बार बातचीत हुई है। चंडीगढ़ से एक वीडियो शेयर करते हुए दमानिया ने सवाल उठाया कि आखिर एक उपमुख्यमंत्री को ऐसे व्यक्ति से इतनी बार बात करने की क्या जरूरत थी?

दमानिया के मुताबिक, एकनाथ शिंदे और खरात के बीच कुल 17 बार फोन पर चर्चा हुई। इनमें से 10 कॉल खुद उपमुख्यमंत्री की ओर से किए गए थे, जबकि 7 कॉल उधर से आए थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक बार दोनों के बीच लगातार 21 मिनट तक लंबी बात हुई। अंजलि दमानिया ने मांग की है कि उपमुख्यमंत्री को राज्य की जनता को यह साफ करना चाहिए कि ये फोन कॉल किस सिलसिले में किए गए थे। इस खुलासे के बाद अब विपक्षी दल भी सरकार को घेरने की तैयारी में जुट गए हैं।

चाकणकर बहनों के साथ लंबी बातचीत

सीडीआर रिपोर्ट में केवल उपमुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। दमानिया ने बताया कि रूपाली ने अशोक खरात को 177 बार फोन किया और दोनों के बीच करीब 33 हजार सेकंड से ज्यादा की लंबी गुफ्तगू हुई। इतना ही नहीं, रूपाली की बहन प्रतिभा चाकणकर ने भी खरात को 236 बार कॉल किए थे। इन आंकड़ों को देखकर ऐसा लगता है कि खरात का इस परिवार के साथ काफी करीबी और पुराना संपर्क था, जो अब जांच का मुख्य विषय बन गया है।

दिग्गज नेताओं के भी निकले कनेक्शन

अंजलि दमानिया की लिस्ट में कुछ और बड़े नाम भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटिल और एनसीपी के सुनील तटकरे ने भी अशोक खरात से 8-8 बार फोन पर बात की है। दमानिया का कहना है कि ये केवल सामान्य फोन कॉल्स का ब्यौरा है, जबकि व्हाट्सएप पर क्या बातें हुईं, उसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। उनका मानना है कि अगर व्हाट्सएप चैट और कॉल की भी जांच हो, तो कई और बड़े राज खुल सकते हैं। इन खुलासों ने यह साफ कर दिया है कि खरात का गिरोह केवल अंधविश्वास तक सीमित नहीं था, बल्कि उसकी पहुंच सत्ता के गलियारों तक थी।

जांच की मांग और बढ़ता दबाव

फिलहाल यह पूरा मामला एसआईटी के पास है, लेकिन दमानिया के इन दावों ने जांच टीम पर भी दबाव बढ़ा दिया है। अशोक खरात के साथ वीडियो और तस्वीरों में दिखने वाले नेता अब तक पल्ला झाड़ते रहे हैं, लेकिन कॉल रिकॉर्ड्स को झुठलाना उनके लिए मुश्किल होगा। अंजलि दमानिया ने कहा कि उन्होंने यह जानकारी इसलिए सार्वजनिक की है ताकि आम जनता को पता चले कि उनके नेता किन लोगों के संपर्क में हैं। अब देखना यह है कि इस गंभीर खुलासे पर उपमुख्यमंत्री कार्यालय और अन्य संबंधित नेता क्या सफाई देते हैं।

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