रिंग रोड (सोर्स-सोशल मीडिया) 
नासिक

सिंहस्थ कुंभ 2027: रिंग रोड के नक्शे में फेरबदल कर निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप, जांच की मांग तेज

Nashik Ring Road project: सिंहस्थ कुंभ 2027 के लिए प्रस्तावित रिंग रोड के अलाइनमेंट में फेरबदल का मामला सामने आया है। सर्वे करने वाली कंपनी 'एकम' पर खुद को आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप है।

रूपम सिंह

Nashik Kumbh Mela Ring Road project : सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के तहत प्रस्तावित 66 किलोमीटर लंबे रिंग रोड परियोजना में गंभीर अनियमितता और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि रिंग रोड का सर्वेक्षण करने वाली निजी कंपनी ‘एकम’ के संचालकों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर सड़क के आलेखन (अलाइनमेंट) में बदलाव कर स्वयं को आर्थिक लाभ पहुंचाया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रिंग रोड के लिए जिला प्रशासन ने 14 मई 2026 को अंतिम भूसंपादन सूची जारी की थी। इस सूची में गौलाणे गांव स्थित गट क्रमांक 11/6 की जमीन का कोई उल्लेख नहीं था। हालांकि, सूची जारी होने के महज 10 दिन बाद परियोजना के नक्शे में बदलाव कर इस जमीन के 21 गुंठे हिस्से को भूसंपादन में शामिल कर लिया गया।

आरोप है कि ‘एकम’ कंपनी के निदेशक सचिन चिंतावार और स्वप्निल चिंतावार ने नवंबर 2025 में गौलाणे गांव में 138 गुंठे जमीन खरीदी थी। उस समय प्रस्तावित रिंग रोड के मूल आलेखन में यह जमीन प्रभावित क्षेत्र में नहीं आती थी। लेकिन बाद में किए गए बदलाव के चलते उनकी जमीन का केवल 21 गुंठे हिस्सा अधिग्रहण में शामिल किया गया, जबकि शेष 117 गुंठे जमीन सीधे रिंग रोड के किनारे यानी ‘हाईवे फ्रंट’ पर आ गई।

स्थानीय नागरिकों और भूमि मालिकों का आरोप है कि यह बदलाव नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार कर किया गया है। उनका कहना है कि किसी भी अंतिम भूसंपादन सूची के प्रकाशन के बाद बिना ठोस तकनीकी कारणों के आलेखन में बदलाव नहीं किया जा सकता। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में नक्शा बदला गया और इसके लिए किस स्तर पर मंजूरी दी गई।

इस कथित फेरबदल से संबंधित जमीन के बाजार मूल्य में भारी वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी हाईवे या रिंग रोड के किनारे स्थित जमीन का व्यावसायिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है, जिससे संबंधित भूमि धारकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।

मामले के सामने आने के बाद रिंग रोड परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। नागरिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सिंहस्थ कुंभ 2027 की सबसे महत्वपूर्ण अधोसंरचना परियोजनाओं में से एक से जुड़ा बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।

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