Hostel Food Poisoning Administration Action Inside Story: महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां सरकारी तंत्र की अनदेखी ने मासूम छात्रों की जान जोखिम में डाल दी। शाहादा शहर स्थित समाज कल्याण विभाग के सरकारी हॉस्टेल में भोजन करने के बाद लगभग 40 छात्र फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए हैं। इस घटना के बाद पूरे इलाके में खलबली मच गई और आनन-फानन में बीमार छात्रों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रावास में शाम का भोजन करने के कुछ ही समय बाद छात्रों ने पेट में दर्द, जी मिचलाने और उल्टी की शिकायत शुरू कर दी। देखते ही देखते बीमार छात्रों की संख्या बढ़ने लगी, जिससे हॉस्टल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रभावित 40 छात्रों को तुरंत शाहादा ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम युद्धस्तर पर उनके उपचार में जुट गई है।
जैसे ही इस सामूहिक फूड पॉइजनिंग की खबर जिला प्रशासन तक पहुंची, जिले के आला अधिकारी तुरंत सक्रिय हो गए। जिलाधिकारी डॉ. मिताली सेठी ने बिना देर किए अस्पताल का रुख किया। उन्होंने न केवल भर्ती छात्रों के स्वास्थ्य की जानकारी ली, बल्कि उनके चिंतित परिजनों से भी मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि छात्रों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
उनके साथ जिला पुलिस अधीक्षक अश्विनी सानप भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद अभिभावकों की शिकायतों को सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि पुलिस इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
मामले की तह तक जाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। घटना के तुरंत बाद छात्रावास के रसोई घर से भोजन के सभी नमूने जब्त कर लिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए छात्रों की उल्टी और अन्य मडिकल सैंपल्स को भी इकट्ठा किया गया है। इन सभी नमूनों को जांच के लिए लैब भेज दिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि भोजन में ऐसा कौन सा जहरीला तत्व था जिसके कारण इतनी बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पड़े।
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जिलाधिकारी डॉ. मिताली सेठी ने इस पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने सरकारी छात्रावासों में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और वहां की साफ-सफाई पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। फिलहाल, सभी छात्रों की स्थिति पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं और प्रशासन मामले की बारीकी से जांच कर रहा है।