Nanded NEET Paper Leak: लातूर और पुणे के बाद अब नांदेड़ शहर भी नीट पेपर लीक घोटाले के केंद्र में आ गया है। नांदेड़ के निजी कोचिंग संस्थानों में इन दिनों करोड़ों रुपये खर्च कर छात्रों के सफलता प्रतिशत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की अंधी होड़ मची हुई है। इसी विज्ञापनबाजी के चक्कर में शहर का एक नामी कोचिंग सेंटर खुद सीबीआई के जाल में फंस गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नीट परीक्षा रद्द किए जाने और आगामी 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा कराने के फैसले के बीच, इस संस्थान ने आधिकारिक परिणाम घोषित होने से पहले ही संदिग्ध छात्रों के सटीक अंकों वाले होर्डिंग्स और सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कर दिए।
इस विज्ञापन में जिस लड़की की तस्वीर को सबसे ऊपर चमकाया गया है, उससे ठीक एक दिन पहले शनिवार को नांदेड़ पहुंची सीबीआई की टीम ने लंबी पूछताछ की थी। यह छात्रा इसी कोचिंग सेंटर की नियमित विद्यार्थी है। विज्ञापन में न सिर्फ इस लड़की बल्कि दो अन्य छात्राओं की तस्वीरें छापकर यह दावा किया गया है कि इन्हें केमिस्ट्री विषय में शत-प्रतिशत अंक मिले हैं। परिणाम से पहले कोचिंग निदेशक को छात्रों के सटीक नंबर कैसे पता चले, इस सवाल ने शिक्षाविदों और नागरिकों के बीच भारी बहस छेड़ दी है।
सीबीआई की तफ्तीश में कदम परिवार की संदिग्ध छात्रा को लेकर बेहद चौंकाने वाली कड़ियां सामने आई हैं। नांदेड़ में रहकर नीट की तैयारी करने के दौरान इस छात्रा को अभ्यास परीक्षाओं में महज 100 से 120 अंक ही मिल पा रहे थे। लेकिन, परीक्षा से ठीक 15 दिन पहले उसे अचानक तैयारी के नाम पर पुणे भेजा गया। पुणे के इस गुप्त प्रवास से लौटकर जब उसने मॉक टेस्ट दिया, तो उसका स्कोर जादुई रूप से उछलकर सीधे 560 अंकों पर पहुंच गया। इस अस्वाभाविक प्रगति ने ही जांच अधिकारियों के कान खड़े कर दिए।
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केंद्रीय एजेंसी को पुख्ता संदेह है कि लड़की के होटल व्यवसायी पिता ने पुणे के परीक्षा माफिया नेटवर्क से संपर्क साधकर अपनी बेटी के लिए 5 लाख रुपये में लीक प्रश्न पत्र और उत्तर कुंजी खरीदी थी। इसी इनपुट के आधार पर मंगलवार को संबंधित लड़की और उसके माता-पिता को पुणे स्थित सीबीआई कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया है। नांदेड़ में कदम परिवार के अलावा सात अन्य रसूखदार परिवारों से भी एजेंसी ने बंद कमरे में पूछताछ की है, जिन्होंने अपने बच्चों के लिए लाखों रुपये देकर पेपर खरीदे थे।
सोशल मीडिया पर इस विज्ञापन के वायरल होने के बाद संबंधित कोचिंग सेंटर के निदेशक की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। शिक्षा जगत में यह चर्चा आम है कि कोचिंग संचालक को पेपर लीक नेटवर्क की पहले से पूरी जानकारी थी, इसी भरोसे उसने एडवांस में विज्ञापन छपवा दिए। सीबीआई अब इस कोण से जांच कर रही है कि क्या नांदेड़ का यह संस्थान भी पुणे की मनीषा वाघमारे और मनीषा मंधारे के उस संगठित गिरोह का हिस्सा है जो छात्रों को एडवांस में उत्तर रटवाने का काम कर रहा था।