Nanded Unique Wedding: भारतीय शादियों में भारी-भरकम साजो-सज्जा, महंगे उपहारों और भव्य दावतों पर पानी की तरह पैसा बहाना आम बात है। लेकिन नांदेड़ के कंधार तालुका के रहने वाले सिद्धेश्वर पेठकर ने समाज के सामने एक नई लकीर खींच दी है। 20 मई को आयोजित हुए इस विवाह समारोह में पारंपरिक रीति-रिवाज, बैंड-बाजे और लजीज पकवानों का पूरा इंतजाम था, लेकिन विवाह के संपन्न होते ही पेठकर परिवार ने एक ऐसी घोषणा की जिससे न केवल गांव वाले भावुक हो गए बल्कि वहां मौजूद नववधू की आंखें भी नम हो गईं।
ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्रों में अक्सर देखा जाता है कि परिवार के एकमात्र कमाऊ मुखिया की किसी अप्रत्याशित हादसे में मौत हो जाने के बाद पूरा परिवार पूरी तरह सड़क पर आ जाता है और कर्ज के दलदल में डूब जाता है। बहादरपुरा जैसे गांवों में सांप के काटने, मानसूनी सीजन में आकाशीय बिजली गिरने, कुएं में गिरने या खेतों में ट्रैक्टर-थ्रेशर चलाते समय होने वाली दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। इसी कड़वी सच्चाई को ध्यान में रखते हुए पेठकर परिवार ने अपने जीवन के सबसे बड़े उत्सव को सामाजिक कल्याण से जोड़ने का फैसला किया।
इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और बिना किसी भेदभाव के अमलीजामा पहनाने के लिए दूल्हे के परिवार ने बहादरपुरा ग्राम पंचायत से संपर्क साधा। ग्राम पंचायत के पास मौजूद आधिकारिक मतदाता सूची को सीधे बीमा कंपनी को सौंप दिया गया। इसके तहत गांव के हर उस नागरिक को इस समूह दुर्घटना बीमा पॉलिसी (Group Accident Insurance Policy) में शामिल किया गया है जिसका नाम सूची में दर्ज था। इससे किसी भी ग्रामीण को अलग से कोई कागजी कार्रवाई या भागदौड़ करने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
यह ऐतिहासिक बीमा पॉलिसी पूरे एक साल की अवधि तक वैध रहेगी। इस दौरान यदि गांव के किसी भी नागरिक के साथ कोई अप्रिय घटना या दुर्घटना होती है, तो उसके आश्रित परिवार को तुरंत एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता बीमा कंपनी के माध्यम से मिल जाएगी। जब स्थानीय मीडिया ने पेठकर परिवार से इस पूरी पॉलिसी के लिए भुगतान किए गए कुल प्रीमियम के खर्च के बारे में जानना चाहा, तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया। परिवार का स्पष्ट मानना है कि सामाजिक सरोकार, दान और पुण्य के लिए खर्च की गई रकम को कभी भी सार्वजनिक कर उसका दिखावा नहीं किया जाना चाहिए।
इस अनोखे विवाह की चर्चा अब केवल नांदेड़ जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के सोशल मीडिया पर सिद्धेश्वर पेठकर और उनके परिवार की इस सोच की जमकर सराहना हो रही है। समाजशास्त्रियों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अगर देश के संपन्न परिवार अपनी शादियों और उत्सवों के खर्च का महज एक छोटा सा हिस्सा भी इस तरह ग्रामीण सुरक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं पर खर्च करने लगें, तो भारत के ग्रामीण अंचलों की सूरत और सीरत दोनों को बहुत कम समय में बदला जा सकता है।