Drought Review Meeting Cashew Almond Eating: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा सहित पूरे राज्य में बारिश की भारी कमी के कारण सूखे की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। फसलें पूरी तरह से सूख जाने के कारण किसान हताश और परेशान हैं। ऐसे में किसानों की समस्याओं, नुकसान और उनकी व्यथा को समझने के लिए नांदेड के जिला नियोजन सभागार में एक विशेष समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया था।
लेकिन इस बैठक का जो दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आया है, उसने पूरे राज्य में खलबली मचा दी है।
बैठक में सूखे के भीषण वास्तविक संकट और किसानों को राहत देने के उपायों पर गंभीर चर्चा करने के बजाय, वहां उपस्थित नेता और वरिष्ठ अधिकारी काजू और बादाम का आनंद लेते हुए नजर आए। इस पूरे वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही आम जनता और विपक्षी दलों में भारी आक्रोश फैल गया है।
विरोधियों ने सरकार और प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि संकट में फंसे किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय अधिकारियों और लोक प्रतिनिधियों को केवल अपनी खातिरदारी की चिंता सता रही है।
इस विवाद पर शिवसेना नेता और मंत्री संजय शिरसाट ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अपनी अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण देते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों की वजह से वे इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे और वे खुद सीधे किसानों से मिलने जाने वाले हैं। उन्होंने आगे कहा कि बैठक में मंत्री दत्ता भरणे अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे और वहां संबंधित प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।
काजू-बादाम पर मचे बवाल के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए संजय शिरसाट ने कहा, बैठक में अधिकारी ही ऐसे काजू-बादाम लाकर रख देते हैं, लेकिन बेवजह बदनाम जनप्रतिनिधियों को होना पड़ता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले को लेकर विभागीय आयुक्त को कड़े निर्देश जारी करेंगे।
किसान संकट के बीच अधिकारियों की इस तरह की बेपरवाही और वीआईपी संस्कृति ने आम लोगों और किसान संगठनों के गुस्से को और अधिक बढ़ा दिया है।