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अजय वहाने को बड़ी राहत: रिश्वत के आरोप से सब-रजिस्ट्रार दोषमुक्त, नागपुर की विशेष अदालत ने सुनाया फैसला

Nagpur Special Court: नागपुर की विशेष अदालत ने सब-रजिस्ट्रार अजय वहाने को रिश्वत के आरोप से बरी किया। साक्ष्यों के अभाव और तकनीकी खामियों के चलते मिली राहत। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

प्रिया जैस

Ajay Wahane Acquittal: भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत ने सहकारिता विभाग के सब-रजिस्ट्रार अजय वहाने को उनके खिलाफ लगे रिश्वत के आरोपों से बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश रेश्मिता राय ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष की तकनीकी खामियों को देखते हुए यह फैसला सुनाया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसके पिता के साहूकारी लाइसेंस के नवीनीकरण के बदले अजय वहाने ने मोबाइल फोन पर बातचीत के दौरान 10,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस शिकायत के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मामला दर्ज कर आरोप पत्र दाखिल किया था।

विवादित काम सौंपा ही नहीं था

अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश नायडू ने पैरवी के दौरान कहा कि मामले की जांच में यह रिकॉर्ड पर आया कि अभियुक्त को लाइसेंस नवीनीकरण का कार्य कभी सौंपा ही नहीं गया था, इसलिए उनके पास ऐसा कोई काम लंबित नहीं था। अदालत में यह साबित किया गया कि पंचनामे में दर्ज मेमोरी कार्ड के विवरण, फोरेंसिक विशेषज्ञ को भेजे गए विवरण और वास्तव में अदालत में पेश किए गए मेमोरी कार्ड के विवरण अलग-अलग थे।

अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी। यहां तक कि जिस फोन नंबर से पहली बार रिश्वत की मांग का दावा किया गया था, अभियोजन पक्ष ने उसकी भी पुष्टि नहीं की थी।

साबित करने में अभियोजन पक्ष विफल

विशेष अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने के लिए आवश्यक ठोस और पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सका। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक काम लंबित होने और रिश्वत की मांग के स्पष्ट साक्ष्य न हों, तब तक अपराध सिद्ध नहीं माना जा सकता। इस मामले में अजय वहाने का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता प्रकाश नायडू, होमेश चौहान, मितेश बैस, सुरभि (गोडबोले) नायडू और ध्रुव शर्मा ने पैरवी की।

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