Town Vending Committee Nagpur: महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे 'पथ विक्रेता (आजीविका संरक्षण व पथविक्रय विनियमन) योजना 2026' के प्रारूप को लेकर सिटी में हॉकर्स और मनपा प्रशासन के बीच का विवाद बढ़ता जा रहा है।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टाउन वेडिंग कमेटी (टीवीसी) के निर्वाचित 8 हॉकर प्रतिनिधियों ने मनपा प्रशासन के रुख पर तीव्र असंतोष व्यक्त करते हुए आयुक्त को एक तत्काल आपत्ति व ज्ञापन सौंपा है।
प्रतिनिधियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी आधिकारिक लिखित सूचना के मनमाने ढंग से आपत्तियों की अंतिम तिथि घोषित कर दी और अब अखबारों में यह दावा किया जा रहा है कि 'प्रशासन को कोई भी आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि जब उन्हें समय सीमा की कोई अधिकृत जानकारी ही नहीं दी गई तो इसे 'हॉकर्स की सहमति' मान लेना पूरी तरह अन्यायपूर्ण और भ्रामक है।
प्रतिनिधियों की ओर से अब्दुल रज्जाक कुरेशी ने स्पष्ट कि वे शहर के हजारों पथ विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। सरकार की नई नीति पर आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराना उनका वैधानिक अधिकार है।
3 अक्टूबर को कुछ समाचार पत्रों में छपी उस खबर पर उन्होंने कड़ा एतराज जताया, जिसमें प्रशासन के हवाले से कहा गया था कि 30 सितंबर तक एक भी आपत्ति नहीं आई। प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि 30 सितंबर की अंतिम तिथि किस शासनादेश या प्रशासनिक आदेश से तय की गई? उसकी प्रमाणित प्रति दी जाए।
राज्य सरकार ने प्रारूप योजना मनपा को किस तारीख को भेजी और टाउन वेंडिंग कमेटी को यह कब प्राप्त हुई? निर्वाचित 8 प्रतिनिधियों को समय सीमा की लिखित सूचना कब और किस माध्यम से भेजी गई?
प्रतिनिधियों ने अंत में स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रशासनिक या सरकारी प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि संविधान और पथ विक्रेता कानून द्वारा मिले अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि हॉकरों की आवाज को अनसुना किए बिना न्यायसंगत तरीके से उनकी आपत्तियों को स्वीकार कर ही अंतिम योजना तैयार की जाए।
प्रतिनिधियों ने उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका क्र। 3890/2021 व 3665/2022 में दिए गए ऐतिहासिक आदेश का हवाला दिया। ज्ञापन के अनुसार, उच्च न्यायालय के आदेश के अनुच्छेद 7 में स्पष्ट निर्देश है कि मसौदा योजना महानगरपालिकाओं को भेजे जाने के बाद टाउन वेंडिंग कमेटी को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 2 महीने का समय दिया गया है।
अदालत ने यह भी निश्चित किया है कि प्रत्येक टीवीसी को सरकार के समक्ष अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। ऐसे में मनपा प्रशासन द्वारा आनन-फानन में समय सीमा समाप्त बताकर प्रक्रिया समेटना अदालत के आदेश की अवहेलना है।