स्मार्ट टॉयलेट में बिक रही चाय (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
नागपुर

स्मार्ट टॉयलेट में बिक रही चाय, केंद्रीय मंत्री निवास के सामने चौराहे की बदहाल तस्वीर

Wardha Road News: नागपुर के जयप्रकाशनगर चौक पर स्मार्ट टॉयलेट और कियोस्क सेंटर अवैध कब्जे से बदहाल। करोड़ों खर्च के बाद भी जनता सुविधाओं से वंचित है।

आंचल लोखंडे

Nagpur News: जनता के पैसों की बर्बादी कैसे की जाती है, इसके अनेक उदाहरण शहर में देखने को मिलते हैं। लेकिन लंदन स्ट्रीट के ठीक मुहाने पर, यानी जयप्रकाशनगर मेट्रो स्टेशन चौक पर बने स्मार्ट टॉयलेट और कियोस्क सेंटर की जो बदहाली है, वह अपने आप में अनोखी मिसाल है।

वर्धा रोड स्थित इसी चौराहे पर एक केंद्रीय मंत्री का निवास स्थान है, जहां नगर प्रशासन के अधिकारी लगभग हर सप्ताह किसी न किसी बैठक के लिए आते-जाते रहते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि उनकी निगाहें इस स्मार्ट टॉयलेट पर हुए अवैध कब्जे और कियोस्क सेंटर की जर्जर स्थिति पर नहीं पड़ रही हैं।

टॉयलेट पर चायवाले का कब्जा

वर्धा रोड से छत्रपति चौक की दिशा में आते समय जयप्रकाशनगर चौक के बाईं ओर नगर प्रशासन ने जनता के पैसों से लाखों रुपये खर्च कर दो स्मार्ट टॉयलेट बनाए हैं। लेकिन नागरिक इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि इनके ठीक सामने एक चाय ठेला संचालक ने अतिक्रमण कर कब्जा जमा लिया है।

टॉयलेट के प्रवेश द्वार पर चाय की गंजियां, वाटर केन और अन्य सामान रखकर उसने अपना ठीया बना लिया है। सुबह से देर रात तक यह सामान वहीं फैला रहता है, जिससे किसी को टॉयलेट के भीतर जाने की जगह ही नहीं मिलती।

यही चौराहा जयताला की दिशा में जाने वाली सड़क, जिसे "लंदन स्ट्रीट" के रूप में विकसित किया जा रहा है, का प्रवेश द्वार भी है और अब इसी स्थान से अतिक्रमण की शुरुआत हो चुकी है।

कियोस्क सेंटर बन रहा कबाड़

स्मार्ट टॉयलेट से कुछ ही दूरी पर बनाया गया कियोस्क सेंटर भी अब बदहाली की कगार पर है। नए फुटपाथ बनने से इसका स्तर (लेवल) नीचे चला गया है, जिससे प्रवेश द्वार बंद हो गया है।

यह सेंटर अब कबाड़ में तब्दील हो रहा है। यहां के स्विच बोर्ड खुले पड़े हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। नागरिक स्मार्ट टॉयलेट का उपयोग करने की बजाय अब कियोस्क सेंटर के आसपास ही लघुशंका कर रहे हैं।

जनता के करोड़ों रुपये खर्च कर नगर प्रशासन ने सुविधाएं तो उपलब्ध कराई हैं, लेकिन उनकी देखभाल और सुरक्षा की किसी को परवाह नहीं है। यही हाल शहरभर में करोड़ों रुपये खर्च कर लगाए गए अत्याधुनिक ट्रैफिक बूथों का भी है, जो अब उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार हैं।

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