Nagpur Rain Infrastructure Failure: नागपुर 'स्मार्ट सिटी' का लेबल लगे शहर का कुछ ही घंटों की बारिश में क्या हाल होता है, यह नागपुरवासियों ने मंगलवार को अनुभव किया। सीमेंट सड़कों की शेखी और करोड़ों रुपये के विकास प्रकल्पों के नाम पर अपनी पीठ थपथपाने वाली सरकार तथा स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नागरिकों ने भारी रोष व्यक्त किया।
लगभग 3 घंटों की बारिश ने पूरे शहर को अपनी चपेट में लेकर हाहाकार मचा दिया। आम नागरिकों के घर, बस्तियां और झोपड़पट्टियां पानी में डूब गई। घर में लाखों रुपये के सामान की बर्बादी तो हुई ही, आवश्यक वस्तुएं और अनाज भी बह गए।
बुधवार को इस संबंध में जायजा लेने पर नागरिकों में भारी नाराजगी दिखाई दी। नागपुरवासियों का जीना मुश्किल करने वाला विकास नहीं चाहिए, ऐसी गुहार लगाते हुए नागरिकों ने 'स्मार्ट सिटी नहीं बल्कि बकवास सिटी' की उपमा भी दी। विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने वाले शहर की वास्तव में क्या स्थिति है, इसका यह आंखों देखा हाल था।
कई क्षेत्रों में इससे पहले इतना जलभराव नहीं होता था कि इतना नुकसान हो। इस बार कई बस्तियों में घरों में पानी भर जाने से अफरा-तफरी मच गई। लोग इधर-उधर भागदौड़ करने लगे। घर का फर्नीचर, अलमारी में रखे कपड़े और अनाज भीगकर खराब हो गए, स्थिति इतनी खराब थी कि घरों के फ्रिज तक पानी में तैर रहे थे।
वॉशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भी पानी के कारण खराब हो गए। उल्लेखनीय है कि 23 सितंबर 2025 को अंबाझरी ओवरफ्लो होने के कारण जिस समता लेआउट, डागा लेआउट और आसपास के क्षेत्रों में भारी मात्रा में पानी घुस गया था, उसी क्षेत्र में फिर से पानी घुस गया। इससे यहां के नागरिकों ने भी भारी रोष व्यक्त किया। इस बारिश में भी पिछली बार की तरह नागरिकों का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विधानसभा क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम नागपुर के स्वरूपनगर, मनीषनगर, खामला, स्नेहनगर, सोनेगांव, सहकारनगर, सोमलवार स्कूल परिसर, शिवशक्ति लेआउट सहित कई बस्तियों में घरों में रखा लाखों रुपये का सामान और सामग्री खराब हो गई। घरों में घुटनों तक पानी जमा था।
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सीमेंट सड़कों की ऊंचाई शहर के लिए कितनी घातक है, यह नागपुरवासी पिछले कुछ वर्षों से भुगत रहे हैं। इसके बावजूद नेताओं और प्रशासन की इसको लेकर जिद जारी है। इससे उन्हें क्या फायदा हो रहा है, इस संबंध में अब नागरिक खुलकर बोल रहे हैं। इसके साथ ही सीवेज लाइनों की सफाई नहीं होने से कई क्षेत्रों में गंदा पानी बह निकला। सड़कों पर भी पानी जमा हो गया।
शहर में सीमेंट की सड़कों का बड़ा जाल बिछाया गया, शहर के नेताओं ने दावा किया कि 50 वर्षों तक गट्टा नहीं होगा, करोड़ों रुपये बचेंगे, वास्तव में गड्ढे हुए ही नहीं, सड़कें फट गईं, प्रशासन से लगातार मांग की जाती रही कि सड़के ऊंची न करें लेकिन मनमाने काम और 'हमें कौन क्या कहेगा' वाली हठी भूमिका के कारण आज जरा सी बारिश में घर-घर में पानी घुस जाता है। यही नजारा एक बार फिर नजर आया।
बारिश के कारण घरों के सामने खड़े चारपहिया वाहन पानी में डूब गए थे। कुछ वाहन तो पानी में तैर रहे थे। दोपहिया वाहनों का तो और भी बुरा हाल हुआ। घर के आंगन और घर के बाहर खड़े दोपहिया वाहन पानी में डूब रहे थे लेकिन उन्हें कहां ले जाएं और कहां रखें, यह सवाल नागरिको के सामने था। वाहनों को पानी में डूबते देखकर कई लोगों की आंखों से आंसू निकल रहे थे।
बुधवार को कई मैकेनिकों की दुकानों पर ऐसे दोपहिया वाहनों को मरम्मत के लिए लाए जाने का दृश्य दिखाई दिया। नरेंद्रनगर, खामला, स्नेहनगर, सोमलवाड़ा, मनीषनगर, न्यू मनीधनगर, उत्तर नागपुर के कामगारनगर, संन्याननगर, दीक्षितनगर, नारी, हुडको लेआउट, इंदौरा बाराखोली, मध्य नागपुर के मोमिनपुरा, नाईकनगर, शांतिनगर, पारडी, भांडेवाडी, हुडकेश्वर, नरसाला, वाठोडा सहित शहर के अनेक क्षेत्रों में घरों में पानी घुस गया था।