सरकारी योजना का झांसा देकर किसानों के दस्तावेज जुटाए सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

SBI और गरीब किसानों से करोड़ों का घोटाला! मुख्य आरोपी सचिन कारेमोरे की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज

SBI Loan Scam: नागपुर के SBI ई-एनडब्ल्यूआर कर्ज घोटाले में मुख्य आरोपी सचिन कारेमोरे की अग्रिम जमानत कोर्ट ने खारिज कर दी। आरोपियों ने किसानों को सरकारी योजना का झांसा देकर दस्तावेज हासिल किए थे।

अंकिता पटेल

Nagpur SBI E-NWR Loan Scam: नागपुर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और गरीब किसानों के साथ हुए एक बड़े ई-एनडब्ल्यूआर (इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद) कर्ज घोटाले के मामले में मुख्य आरोपी सचिन खुशाल कारेमोरे की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश प्रवीण पाटिल ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने फैसले में आर्थिक अपराधों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए आरोपी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, अगस्त 2024 से सितंबर 2025 के बीच आरोपियों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत बैंक, वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) और गरीब किसानों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया।

आरोपियों ने गरीब किसानों को एक फर्जी 'सरकारी योजना' का लालच दिया और कहा कि योजना के तहत खाते खोलने पर उन्हें 10,000 रुपये मिलेंगे। इस लालच में आकर किसानों ने अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड और बिजली बिल जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज आरोपियों को सौंप दिए।

किसानों के खातों से डायवर्ट किया पैसा

किसानों से प्राप्त दस्तावेजों का इस्तेमाल करके आरोपियों ने किसानों के नाम पर बैंक खाते खोले और कृषि उत्पादों (जैसे चावल, तूर और दाल) के भंडारण की फर्जी इलेक्ट्रॉनिक वेयरहाउस रसीदें (ई-एनडब्ल्यूआर) तैयार की। इन फर्जी रसीदों के आधार पर मौदा स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से भारी भरकम कर्ज प्राप्त किया गया और इस पैसे को किसानों के खातों से डायवर्ट करके आरोपियों ने अपने निजी आर्थिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया, जांच

में सामने आया कि सचिन कारेमोरे ने मेसर्स जायसवाल एग्रो ट्रेडिंग, अन्नपूर्णा एग्रो ट्रेडिंग और कृष्णथरूंगा फार्स प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड के खातों से 1,12.80,000 रुपये की भारी भरकम राशि प्राप्त की। इसके अलावा उसे महाराणा कॉर्पोरेशन से भी 10,79,000 रुपये मिले। जब पुलिस ने इन ट्रेडिंग कंपनियों की जांच की तो इनके पते फर्जी पाए गए और इनके मालिक (जो मामले में सह-आरोपी है। फरार मिले।

व्यापारिक लेन-देन के तहत मिली रकम

बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दलील दी कि सचिन केवल एक व्यापारी है और उसे यह रकम व्यापारिक लेन-देन के तहत मिली। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस मामले में देयरहाउस (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2007 के प्रावधान लागू होने चाहिए और उनके मुवक्किल का किसी भी फर्जी रसीद या बैंक कर्ज समझौते से सीधा संबंध नहीं है।

सचिन ने अपने भाई रोशन कारेमोरे को इसी मामले में मिली जमानत का हवाला देकर समानता के आधार पर अग्रिम जमानत मांगी लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि रोशन के खिलाफ आरोप अलग थे।

CJP Protest: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने बदला फैसला, 57 की जगह 45 मेट्रो स्टेशन ही रहेंगे बंद

CJP प्रदर्शन के बीच दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर हाहाकार, जाम में फंसी हजारों गाड़ियां; देखें VIDEO

प्रामाणिक वोटर लिस्ट से ही मजबूत होगा लोकतंत्र... SIR के समर्थन में बोले VHP प्रवक्ता श्रीराज नायर

जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले प्रकाश आंबेडकर का हमला, सत्ता और विपक्ष दोनों पर लगाया दबाने की राजनीति का आरोप

मेट्रो, ट्रेन, इंटरनेट और शराब की दुकानों पर पाबंदी, दिल्ली में कल क्या खुलेगा-क्या बंद?