US व्यापार प्रतिनिधि ने भारत को बताया 'कठिन बाजार', कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच की मांग

US India Bilateral Talks: US व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने भारत को अमेरिका के लिए व्यापार के लिहाज से सबसे कठिन बाजारों में से एक है। दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए काम कर रहे हैं।
US Trade Representative Jamieson Greer Calls India a Tough Market, Pushes for Greater Agricultural Access
भारत-अमेरिका व्यापार (सोर्स-सोशल मीडिया)
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India Toughest Trade Markets: अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों और बाजार पहुंच को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। US व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने भारत को व्यापार के लिहाज से सबसे कठिन बाजारों में से एक करार दिया है। उन्होंने बताया है कि दोनों देश एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। हालांकि, विशेष रूप से खेती और बाजार तक पहुंच को लेकर दोनों देशों के बीच अभी भी कई बड़ी दिक्कतें बनी हुई हैं।

कृषि बाजार और नीतियां जेमिसन

ग्रीर ने हाउस वेज एंड मीन्स समिति के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को व्यापार समझौते के लिए तैयार करना बिल्कुल आसान काम नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत ने अपने कृषि बाजार को लंबे समय से पूरी तरह सुरक्षित रखा है जो समझौते में एक बड़ी बाधा है। भारत में कृषि क्षेत्र बहुत संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यह वहां के ग्रामीण लोगों की रोजी-रोटी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। इसी कारण से भारत ने खेती के क्षेत्र में ऊंचे टैक्स और दूसरे कई कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं।

अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए

मौके यह महत्वपूर्ण बात तब सामने आई जब US में खेती से जुड़े उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने पर चर्चा हो रही थी। US भारत के विशाल बाजार में डीडीजीएस (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स), सोयाबीन मील और एथेनॉल जैसे उत्पादों के लिए बड़े मौके तलाश रहा है। US नेता इस बात को लेकर कई बार शिकायत कर चुके हैं कि उनके कृषि उत्पादों को भारत के बाजार में आसानी से जगह नहीं मिलती है।

वाशिंगटन में द्विपक्षीय बातचीत

ग्रीर ने बताया कि इस हफ्ते भारतीय व्यापार अधिकारी अमेरिका के वाशिंगटन में बातचीत के लिए मौजूद थे। दोनों देशों के बीच एक बड़े द्विपक्षीय समझौते के तहत यह महत्वपूर्ण और रणनीतिक बातचीत लगातार जारी है। बुधवार को भारत के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और अन्य प्रशासन अधिकारियों के साथ अपनी ताजा बातचीत पूरी की है।

सहमति के संभावित क्षेत्र

यद्यपि यह बातचीत आसान नहीं है, लेकिन ग्रीर का मानना है कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों देश आपस में सहमति बना सकते हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में समझौते की उम्मीद है जहां भारत के अंदरूनी हित ज्यादा प्रभावित नहीं होते हैं। ग्रीर ने ऐसे ही एक संभावित क्षेत्र के रूप में डीडीजीएस (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स) का विशेष रूप से उल्लेख किया है।

बराबरी (रेसिप्रोसिटी) की व्यापार नीति

ग्रीर ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की व्यापार नीति का मुख्य मकसद बराबरी या रेसिप्रोसिटी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जो देश US के बाजार का फायदा उठाते हैं, उन्हें भी अपने बाजार अमेरिका के लिए खोलने चाहिए। बैठक में प्रतिनिधियों ने माना कि भारत ने कुछ उत्पादों पर टैक्स कम किए हैं, लेकिन अभी और भी बड़े बदलावों की सख्त जरूरत है। US चाहता है कि उसके कृषि और औद्योगिक उत्पादों को भारत में ज्यादा मौका मिले, जबकि भारत अपनी सेवाओं और निर्यात के लिए पहुंच मांग सकता है।

रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी

पिछले 10 सालों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है जिससे भारत US का एक अहम रणनीतिक साझेदार बन गया है। खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत अब अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है। हालांकि, इसके बावजूद टैक्स, डिजिटल व्यापार और खेती से जुड़े अहम मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच अक्सर तनाव देखने को मिलता रहा है।

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