Nagpur Food Distribution Department: नागपुर राशन विभाग में सालों से समानांतर चल रहे कथित भागीदारी (पार्टनरशिप) के खेल से अगले कुछ दिनों में पर्दा उठ जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार विभागीय अधिकारी के आदेश पर गठित जांच समिति ने इस प्रकरण की जांच पूरी कर ली है और अगले कुछ दिनों में समिति अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप देगी।
हालांकि जांच पूरी किए जाने में काफी समय लग जाने से भी अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए लेकिन अंततः जांच समिति ने अपना काम पूर्ण कर लिया है। इस लिए अब राशन विभाग में हुई इस धांधली में कई बड़े खुलासे होने की संभावना है।
बता दें कि पिछले काफी समय से नागपुर शहर के अन्न धन्य वितरण विभाग में 'भागीदारी' प्रकरण काफी चर्चा में रहा है लेकिन 'भागीदारी प्रकरण' का सच अब ज्यादा दिनों तक फाइलों में दफन नहीं रहेगा।
वर्षों पहले नागपुर शहर अन्न धन्य वितरण विभाग अंतर्गत कई राशन दुकाने बंद अवस्था में पड़ने की बात विभाग के संज्ञान में आने के बाद राशन माफियाओं के साथ मिलकर इन्हें हथियाने का खेल शुरू हुआ था। अधिकारियों की साठगांठ से राशन क्षेत्र में जुड़े लोग संबंधित दुकानों के संचालक के साथ मिलकर कागज पर भागीदारी से दुकान का संचालन करने का एग्रीमेट बनाकर एफडीओ की मदद से मंत्रालय तक प्रस्ताव भेजा जाने लगा।
वर्ष 2013 से यह खेल शुरू हुआ और धीरे-धीरे मंत्रालय तक भागीदारी का प्रस्ताव बनाकर भेजा जाता रहा और इन्हें कागज पर मंजूरी भी दी गई। ऐसे करीब 100 से अधिक राशन दुकानों के भागीदारी के प्रस्ताव बनाकर अलग-अलग तत्कालीन एफडीओ ने अपने कार्यकाल में भागीदारी को मंजूरी दिलाई, हालांकि राशन क्षेत्र से ही जुड़े कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे नियम के खिलाफ बताया और विभागीय आयुक्त के पास शिकायत की गई।
नियम अनुसार भागीदारी करके देने का कोई प्रावधान सरकारी अधिसूचना में नहीं है। इसलिए विभागीय आयुक्त ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित करके जांच करने के आदेश दिए। सूत्रों की मानें तो इस जांच से न केवल विभागीय साठगांठ का पर्दाफाश होगा बल्कि यह भी साफ हो जाएगा कि यह महज प्रक्रियात्मक खामी थी या इसकी आड़ में राशन माफियाओं का कोई बड़ा 'स्कैम' फल-फूल रहा था।
नागपुर राशन विभाग में सालों से समानांतर चल रहे कथित भागीदारी मामले की जांच पूरी हो चुकी और इसकी रिपोर्ट भी लगभग तैयार कर ली गई है। आगामी दो दिनों में इसे अंतिम रूप देकर संबंधित एसडीओ को सौंप दिया जाएगा।
इसके बाद यह रिपोर्ट जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इस मामले में कई पक्ष और कानूनी पहलू शामिल होने के कारण प्रक्रिया में ढाई से तीन महीने का समय लगा। प्राथमिक जांच में कुछ कमियां सामने आई है। हालांकि विस्तृत जानकारी और आधिकारिक निर्णय रिपोर्ट जिलाधिकारी के पास जमा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पंकज जलेकर, अध्यक्ष भागीदारी प्रकरण' जांच समिति, नागपुर