Auto Rickshaw Unions Threaten Protests Over Removal Prepaid Booth: विश्वस्तरीय पुनर्विकास परियोजना के दौर से गुजर रहे नागपुर मध्य रेलवे स्टेशन पर ऑटोरिक्शा स्टैंड का कब्जा हासिल करने को लेकर विभिन्न ऑटो यूनियनों और रेल प्रशासन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। स्टेशन के पश्चिमी भाग में विकास कार्यों का हवाला देकर सालों पुराने प्रीपेड ऑटो बूथ को हटा दिए जाने के बाद से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। जहां एक संगठन संवाद और सुरक्षा का हवाला देकर बूथ बहाल करने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरा संगठन मांगें न पूरी होने पर उग्र आंदोलन और 'रास्ता रोको' की सीधी चेतावनी दे रहा है।
स्टेशन के पश्चिमी प्रवेश द्वार पर पिछले 12 वर्षों से 'लोक सेवा प्रीपेड ऑटो चालक मालक संगठन' द्वारा प्रीपेड ऑटो बूथ का संचालन किया जा रहा था। हाल ही में मंडल रेल प्रशासन ने आवश्यक दस्तावेज न होने का तर्क देकर इसे अवैध करार दिया और ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई से पिछले 40 सालों से यहां से यात्रियों को ले जाने वाले करीब 500 से अधिक ऑटो चालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय यात्रियों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए प्रीपेड सिस्टम सुरक्षा और तय किराए के लिहाज से काफी मुफीद साबित होता था।
ई-नीलामी से कमाई की ताक में रेलवे, यूनियनों की लामबंदी
रेलवे प्रशासन अब दोपहिया और चारपहिया वाहनों की तर्ज पर ऑटोरिक्शा पार्किंग स्टैंड की भी ई-नीलामी (E-Auction) कराकर राजस्व कमाने की योजना बना रहा है। इसी ई-नीलामी को रोकने के लिए 'भारतीय ऑटोरिक्शा कामगार संघ' मैदान में उतर आया है। संगठन ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के माध्यम से दबाव बनाने का प्रयास किया और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर नागपुर व इतवारी रेलवे स्टेशन का पार्किंग स्टैंड संघ के सुपुर्द करने तथा मीटर प्रणाली में अड़चन न डालने की मांग रखी है।
भारतीय ऑटोरिक्शा कामगार संघ द्वारा दिए गए अल्टीमेटम की 31 अगस्त की समयसीमा समाप्त हो चुकी है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि यदि रेल प्रशासन ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो वे स्टेशन परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और 'रास्ता रोको' आंदोलन करेंगे। इससे नागपुर रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों की फजीहत होना तय माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि रेल प्रशासन नीलामी की जिद पर अड़ा रहता है या ऑटोरिक्शा चालकों के साथ किसी समझौते पर पहुंचता है।