Nagpur Bhosale Dynasty: विदर्भ के गौरव और मराठा साम्राज्य के पूर्वी विस्तार के प्रतीक रघुजी राजे भोसले की तलवार अब महाराष्ट्र लाई जा रही है। यह न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर की वापसी है, बल्कि नागपुर और विदर्भ के इतिहास को पुनर्जीवित करने का एक अवसर भी है। तलवार की वापसी की खबर ने एक बार फिर लोगों को याद दिला दिया है कि रघुजी भोसले कौन थे और नागपुर से उनका इतना गहरा रिश्ता क्यों है।
भोसले वंश में जन्मे रघुजी भोसले, शाहूजी महाराज के शासनकाल में एक प्रमुख सेनापति थे। जब मराठा साम्राज्य सातारा से बाहर अपने प्रभाव को मजबूत कर रहा था तब रघुजी को पूर्व की ओर विस्तार का जिम्मा सौंपा गया। रघुजी भोसले 18वीं शताब्दी के एक शक्तिशाली मराठा योद्धा और शासक थे। उन्होंने बरार से बंगाल तक मराठा साम्राज्य का प्रभाव फैलाया। रघुजी भोसले ने गोंडवाना, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और बंगाल में सैन्य अभियानों के जरिया राजनीतिक नक्शा ही बदल दिया।
रघुजी भोसले ने 1739 में गोंडवाना (देवगढ़) के गोंड राजा को हराकर नागपुर में भोसले शासन की नींव रखी। उन्होंने नागपुर को अपनी राजधानी बनाया।
नागपुर न केवल उनकी राजधानी थी, बल्कि मराठा साम्राज्य की राजधानी भी बनी। यह उनके गौरव और पहचान का केंद्र भी था। उन्होंने यहां किले, मंदिर और प्रशासनिक ढांचे बनवाए। सांस्कृतिक संरक्षण उनकी नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था - उन्होंने कला, साहित्य और धार्मिक आयोजनों को बढ़ावा देकर नागपुर को एक समृद्ध सांस्कृतिक शहर बनाया।
महाराष्ट्र सरकार ने रघुजी भोसले की तलवार को लंदन में 29 अप्रैल 2025 को हुई नीलामी में खरीदा। मराठा योद्धा रघुजी भोसले प्रथम की ऐतिहासिक तलवार को राज्य सरकार ने 47.15 लाख में खरीदा।
महाराष्ट्र सरकार में सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार ने 11 अगस्त को लंदन जाकर तलवार को अपनी कब्जे में लिया। यह तलवार 18 अगस्त को महाराष्ट्र लाई जाएगी।
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रघुजी भोसले की तलवार न केवल एक युद्ध हथियार है, बल्कि उनकी वीरता, नेतृत्व और रणनीतिक दूरदर्शिता का प्रतीक मानी जाती है। यह तलवार उनके कई अभियानों की साक्षी रही है और उनके शासन की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है।