नागपुर प्रभाग 12 (डिजाइन फोटो) 
नागपुर

Nagpur Prabhag 12: आरक्षण लॉटरी ने बदली तस्वीर! कौन-सा वर्ग किस सीट पर खेलेगा दांव?

Nagpur Elections: नागपुर जिले के दाभा के श्मशान घाट विवाद, कोरोना काल के विकास कार्य, टिकट दावेदारों की बढ़ी जंग और प्रभाग-12 के वोट समीकरण का विस्तृत रिपोर्ट।

प्रिया जैस

Nagpur Ward 12 Report: वर्ष 2017 के आम चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद 2019 में अचानक कोरोना की दस्तक ने पूरे सिस्टम को पंगु बनाकर रख दिया था। चूंकि लोगों का बाहर निकलना मुश्किल था, ऐसे में विकास कार्य करना संभव नहीं था। फिर भी इस संकट को अवसर के रूप में परिवर्तित कर लोगों को इस दौरान स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का काम किया।

भले ही इस कार्यकाल में कम समय मिला हो लेकिन कम समय होने के बाद भी मेहनत से अधिक काम को अंजाम देने का दावा प्रभाग-12 की पार्षद रहीं दर्शनी धवड़ ने किया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रत्येक पार्षद कुछ न कुछ कार्य करता ही है किंतु संकट के समय भी लोगों की सेवा में बने रहना सबसे बड़ी चुनौती रहती है। ऐसे समय में केटीनगर स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने की दिशा में काफी प्रयास किए।

प्रभाग में मुश्किलें

प्रभाग में 14 अनधिकृत लेआउट हैं जहां विकास कार्यों को अंजाम देना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। यहां पर सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई हैं। दाभा जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में बिजली, सड़क और पानी की किल्लत को काफी हद तक कम करने में इन 3 वर्षों में सफलता मिल पाई है। अब भविष्य में स्लम क्षेत्र में जर्जर हो चुकी सीवरेज आदि को बदलने को प्राथमिकता देना है।

दाभा में घाट नहीं

पूर्व पार्षद का मानना है कि दाभा जैसे प्रभाग में अंतिम संस्कार के लिए सुविधा नहीं है। सिटी में किसी प्रभाग की इस तरह की हालत चिंताजनक है, इसीलिए दाभा में घाट के लिए निधि जुटाने में कड़ी मेहनत की जिसके फलस्वरूप 45 लाख रुपए की निधि भी प्राप्त हुई। यहां तक कि श्मशान घाट के विकास के लिए टेंडर मंगाकर कार्यादेश भी जारी किया गया किंतु इसमें भी राजनीति ने कबाड़ा कर दिया। कुछ लोगों की आपत्ति के कारण सत्तापक्ष ने इसे अटका दिया जिसका आलम यह है कि अब तक इसे अंजाम नहीं दिया जा सका है। प्रशासक राज में अधिकारियों की मनमानी जारी है। पार्षदों की पूछ-परख खत्म हो गई है। केवल प्रशासन की मर्जी से कामों को मंजूरी मिल रही है, जबकि पार्षद जनता के साथ जुड़े रहते हैं।

वर्ष 2017 की स्थिति

जीतने वाले प्रत्याशी वोट्स दूसरे नंबर के प्रत्याशी वोट्स
दर्शनी धवड़ 12,247 राखी शिंगारे 9,410
माया इवनाते 13,073 रोशनी आत्राम 10,536
हरीश ग्वालबंशी 14,005 साधना बरडे 11,041
जगदीश ग्वालबंशी 9,632 दीपक वानखेड़े 7,966

टिकट के दावेदार

कांग्रेस :- दर्शनी धवड़, हरीश ग्वालबंशी, अभिजीत झा, प्रकाश वाढवे, मीना चौधरी, युगल विदावत। भाजपा :- माया इवनाते, विक्रम ग्वालबंशी, सतीश वडे, विनोद सिंह बघेल, किशन गावंडे, राजेश्वर सिंह, पवन प्रजापति, योगेश त्रिवेदी, राखी शिंगारे। बसपा :- श्रीकांत बडगे, भास्कर कांबले, वीरेश परतेकी, वर्षा सहारे, संचिता गजभिए, कल्पना तेलंग, कल्पना बडगे।

प्रभाग में मतदाताओं का समीकरण

वर्ग संख्या
कुल जनसंख्या 59,756
अनुसूचित जाति (SC) 10,059
अनुसूचित जनजाति (ST) 4,296
ओबीसी (OBC) 28,000
मुस्लिम 14,000
अन्य 6,000

आरक्षण लॉटरी के बाद स्थिति

12-अ अनुसूचित जाति (महिला) 12-ब अनुसूचित जनजाति (पुरुष) 12-क ओबीसी (महिला) 12-ड सर्वसाधारण (पुरुष)

शिवसेना-राकां का जनाधार नहीं

दाभा जैसे प्रभाग-12 में राजनीतिक स्थिति अजीबोगरीब है। 4 सीटों के इस प्रभाग में जहां 2 सीटें भाजपा के पास हैं वहीं 2 सीटें कांग्रेस के पास है। ग्वालबंशी की पकड़ के इस प्रभाग में 2 सीटें ग्वालबंशी परिवार ने ही जीती थीं, जबकि 2 सीटों पर अन्य ने जीत दर्ज की। वर्ष 2017 के आंकड़ों को देखा जाए तो इस प्रभाग में न तो शिवसेना और न ही राष्ट्रवादी कांग्रेस का कोई जनाधार दिखाई दिया है।

शुरुआत में प्रभाग-12-ड से जीत दर्ज करने वाले जगदीश ग्वालबंशी को छोड़ दिया जाए तो अन्य जीतने वाले पार्षदों ने 12,000 से अधिक वोट प्राप्त किए थे। जगदीश ग्वालबंशी के गुजर जाने के बाद इस प्रभाग में उपचुनाव कराए गए जहां उनके परिवार से ही विक्रम ग्वालबंशी ने जीत दर्ज की थी। माना जा रहा है कि निकट भविष्य में होने वाले आम चुनावों में भी कुछ इसी तरह के समीकरण हो सकते हैं।

बसपा का असर नहीं

राजनीतिक जानकारों के अनुसार प्रभाग-12 दाभा से सटे प्रभाग-11 में भले ही बसपा का कुछ असर हो किंतु इस प्रभाग में उसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए संभवत: प्रत्याशियों को उतारने की कवायद हो रही है। हालांकि गत समय भी प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा गया था। किंतु कोई भी प्रत्याशी 1,900 से अधिक वोट नहीं ले पाया था।

यहां तक कि 4 सीटों के इस प्रभाग में प्रत्याशी नहीं मिलने के कारण पार्टी की ओर से 2 सीटों पर प्रत्याशी ही खड़ा नहीं किया गया। प्रभाग-12ड में कांग्रेस को 1,600 वोटों से हार देखनी पड़ी थी, जबकि इससे दोगुने वोट कांग्रेस की बागी प्रत्याशी मीना चौधरी ने प्राप्त कर लिए थे जिससे इस सीट पर भविष्य में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

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