प्लास्टिक प्रतिबंध, मानेवाड़ा चौक, बेसा चौक, पिपला, पर्यावरण संरक्षण,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)  
नागपुर

अभियान बहुत, असर कम! नागपुर में नहीं थम रहा प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग; प्रशासन पर उठे सवाल

Nagpur Plastic Pollution: नागपुर के मानेवाड़ा, बेसा व पिपला क्षेत्रों में प्रतिबंधित प्लास्टिक पन्नियों का उपयोग जारी है। नागरिकों ने कार्रवाई में ढिलाई व अवैध कारोबार को संरक्षण देने के आरोप लगाए है।

अंकिता पटेल

Nagpur Plastic Ban: नागपुर जिले में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रतिबंधित प्लास्टिक पन्नियों के उपयोग पर रोक लगाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन शहर के मानेवाड़ा चौक से लेकर बेसा चौक, पिपला तथा आसपास के क्षेत्रों में दुकानों में प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग और पन्नियों का उपयोग खुलेआम जारी है।

प्रतिबंध के बावजूद प्लास्टिक का खुलेआम उपयोग, कार्रवाई पर उठे सवाल

क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि दुकानदारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। मानेवाड़ा चौक से लेकर बेसा चौक और पिपला क्षेत्र में प्रतिबंधित प्लास्टिक पन्नियों का खुलेआम उपयोग जारी है। कई बार कार्रवाई के नाम पर विभागीय कर्मचारियों द्वारा केवल खानापूर्ति कर दुकानदारों को संरक्षण देने की बात भी सामने आती रही है, जिससे यह अवैध व्यापार वर्षों से लगातार बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर सरकार द्वारा प्लास्टिक पर रोक लगाने के दावे और अभियान केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण और पशुओं पर बढ़ता खतरा

उपयोग के बाद प्लास्टिक कचरा खुले में और नालियों में फेंका जा रहा है, जिससे पर्यावरण और पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्लास्टिक पन्नियों का उपयोग करने के बाद उन्हें सड़कों के किनारे, खाली भूखंडों, सार्वजनिक स्थानों और नालियों में फेंक दिया जाता है। इससे क्षेत्र में गंदगी बढ़ रही है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि खुले में पड़े कचरे के साथ यह प्लास्टिक पन्नियां मवेशियों द्वारा निगल ली जाती हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार, प्लास्टिक खाने से गायों और अन्य पशुओं के पेट में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

नियमों का उल्लंघन

क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि इस संबंध में महानगरपालिका और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार शिकायते की जा चुकी है। प्रतिबंधित प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।

इसके बावजूद स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता के कारण प्रतिबंधित प्लास्टिक का कारोबार और उपयोग बिना किसी डर के जारी है।

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