जुन्नर में मल्चिंग पेपर बना पर्यावरण के लिए खतरा, खेतों से जलस्रोत तक बढ़ा प्लास्टिक प्रदूषण

Mulching Paper Pollution:  खेती में इस्तेमाल होने वाला मल्चिंग पेपर अब पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। खुले में फेंका जा रहा प्लास्टिक कचरा मवेशियों पर असर डाल रहा है।
Mulching Paper Pollution Threat News
जुन्नार खेती का प्लास्टिक कचरा (सौ. सोशल मीडिया )
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Mulching Paper Pollution Threat: खेती में उत्पादन बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाने वाला मल्चिंग पेपर अब पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

जुन्नर तालुका के कई गांवों में किसान सब्जियों और फूलों की खेती में बड़े पैमाने पर मल्चिंग पेपर का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन फसल कटाई के बाद खुले में फेंकी जा रही इस प्लास्टिक कचरे की ढेरी नई चिंता खड़ी कर रही है।

फसल लेने के बाद पेपर को फेंक देते हैं किसान

डिंगोरे, उदापुर, बनकर फाटा, पिंपलगांव जोगा, आले, पिंपलवंडी, उंब्रज और कालवाडी क्षेत्रों में टमाटर, मिर्च, ककड़ी, ग्वार, तोरई (दोडका), शिमला मिर्च और गेंदे की खेती के लिए मल्चिंग पेपर का उपयोग तेजी से बढ़ा है। कम पानी में अधिक उत्पादन मिलने के कारण किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं।

हालांकि, एक सीजन के बाद उपयोग किया गया प्लास्टिक पेपर खेतों के किनारे, सड़कों के पास और नदी-नालों के आसपास लावारिस फेंक दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तेज धूप और बारिश के कारण यह प्लास्टिक छोटे-छोटे टुकड़ों में बदल जाता है। बारिश के दौरान यही प्लास्टिक जलस्रोतों में मिलकर पानी को प्रदूषित करता है।

मल्चिंग पेपर खेती के लिए उपयोगी जरूर है, लेकिन उपयोग के बाद उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है। - अनिल मेहेर (प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, नारायणगांव)

फेंके गए मल्चिंग पेपर का मवेशी कर रहे सेवन

दूसरी ओर, खेतों के आसपास चरने वाले मवेशी इस प्लास्टिक को चारे के साथ निगल लेते हैं, जिससे उनकी भूख कम हो जाती है, पेट संबंधी बीमारियां बढ़ती है और दूध उत्पादन प्रभावित होता है। कई मामलों में प्लास्टिक पेट में जमा होने के कारण पशुओं की मौत भी हो चुकी है।

कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह खतरा केवल पशुओं तक ही सीमित नहीं है। प्लास्टिक के ये सूक्ष्म कण पानी और खाद्य श्रृंखला (फूड चेन) के माध्यम से मानव शरीर में भी पहुंच रहे हैं, जिससे कैसर जैसी कई गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

मल्चिंग का सचः उपयोगिता और चुनौतियां

  • मल्चिंग पेपर एक विशेष प्रकार की प्लास्टिक शीट होती है, जिसे फसल की कतारों के ऊपर जमीन पर बिछाया जाता है। इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और कम पानी में बेहतर उत्पादन मिलता है।
  • खेतों में खरपतवार कम उगते हैं और फलों तथा सब्जियों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। यही वजह है कि जुन्नर क्षेत्र में
  • टमाटर, मिर्च, ककड़ी, शिमला मिर्च और फूलों की खेती करने वाले किसान तेजी से इस तकनीक का रुख कर रहे हैं।
  • हालांकि, उपयोग के बाद इस प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निपटान की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं होने से, यही मददगार मल्चिंग पेपर अब पर्यावरण और इंसानी जिंदगी के लिए एक नई और भयावह चुनौती बनता जा रहा है।
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