(प्रतीकात्मक तस्वीर) 
नागपुर

कर्मचारियों को मिलेगा छठवां और 7वां वेतनमान, हाई कोर्ट ने दिए हिरानी पॉलिटेक्निक मामले में दिया आदेश

Nagpur News: कम प्रवेश दर के कारण वेतन न मिलने पर डॉ. एनपी हिरानी पॉलिटेक्निक के कर्मचारियों ने कोर्ट का रुख किया। 7 साल बाद हाई कोर्ट ने लंबित वेतन तीन माह में देने का आदेश दिया।

आकाश मसने

7th Pay Scale: कॉलेज में छात्रों की कम प्रवेश दर के कारण कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करने से इनकार कर दिया गया। हश्र यह हुआ कि 25 माह के वेतन का बकाया हो गया। कर्मचारियों की ओर से असहयोग आंदोलन भी किया गया किंतु इसे बाद में वापस ले लिया गया। बाद में उन्हें मस्टर रोल पर हस्ताक्षर करने की अनुमति भी नहीं दी गई। इन तमाम मुद्दों को लेकर डॉ. एनपी हिरानी पॉलिटेक्निक के कर्मचारी मंजूर अहमद एवं अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

लगभग 7 वर्षों तक चली न्यायिक लड़ाई के बाद अब हाई कोर्ट ने कर्मचारियों को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा निर्धारित वेतनमान के अनुसार उनके लंबित वेतन और छठवें व सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के सभी लाभ तीन महीने के भीतर प्रदान करने के आदेश प्रबंधन को दिए।

समान काम के लिए समान वेतन

अदालत ने आदेश में कहा कि 'समान काम के लिए समान वेतन' का सिद्धांत इस मामले में लागू होता है और प्रबंधन के पास सरकारी प्रस्तावों का पालन न करने का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के भीतर कर्मचारियों को उनके छठवें और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सभी लाभ दें।

यह भी उल्लेख किया गया कि प्रतिवादी संस्थान ने पहले ही 37,41,215 रुपये की कुछ बकाया राशि जमा कर दी है और आगे की राशि के लिए संपत्ति बेचने की अनुमति मांगी है। सुनवाई के दौरान प्रबंधन की ओर से याचिकाकर्ताओं के तर्कों का पुरजोर विरोध किया गया।

सरकार पर बकाया छात्रवृत्ति

प्रबंधन ने दावा किया कि याचिकाकर्ताओं ने जनवरी 2018 से अवैध हड़ताल की थी और वे मार्च 2018 से 7 सितंबर, 2018 तक संस्थान में उपस्थित नहीं हुए थे। प्रबंधन ने 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारी इस अवधि के वेतन के हकदार नहीं हैं।

प्रबंधन ने यह भी बताया कि संस्थान 1984-85 में 'स्थायी गैर-अनुदान आधार' पर स्थापित किया गया था और आय का एकमात्र स्रोत छात्रों से प्राप्त होने वाली फीस है। उन्होंने दलील दी कि 2014-15 से छात्रों की संख्या में भारी कमी के कारण वित्तीय कठिनाइयां बढ़ गई हैं और राज्य सरकार द्वारा छात्रवृत्ति राशि (लगभग 1।20 करोड़ रुपये) जारी न करने के कारण भी बड़ी राशि बकाया है।

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