Nagpur NMC Service Rules: नागपुर महानगर पालिका की आम सभा में कर्मचारियों की पदोन्नति, सेवा प्रवेश नियमों में संशोधन और प्रशासन के कामकाज को लेकर जोरदार बहस देखने को मिली। सदन में उप-अभियंता पद के लिए शैक्षिक योग्यताओं को बदलने के प्रस्ताव पर कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद अभिषेक शंभरकर ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया और कर्मचारियों के साथ किए जा रहे कथित भेदभाव का मुद्दा जोर-शोर से उठाया।
सदन में उप-अभियंता पद के लिए शैक्षिक नियमों में बदलाव का प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा गया। इस पर शंभरकर ने तीखे सवाल किए कि आखिर प्रशासन को यह नियम बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या महानगर पालिका के पास पर्याप्त शिक्षित अधिकारी मौजूद नहीं हैं?
प्रशासन की ओर से इसका स्पष्टीकरण देते हुए बताया गया कि इलेट्रिकल विभाग में कई कर्मचारी पिछले 10-15 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं लेकिन सेवा प्रवेश नियमों में 'डिग्री' की अनिवार्यता होने के कारण उन्हें पदोन्नति के अवसर नहीं मिल पा रहे थे। कर्मचारियों और कई जनप्रतिनिधियों की लगातार यह मांग थी कि उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए पदोन्नति दी जाए जिसके चलते डिग्री की यह अनिवार्य शर्त हटाने का प्रस्ताव लाया गया।
सदन में चर्चा के दौरान पार्षद शंभरकर ने सामान्य प्रशासन विभाग पर 'दोगली भूमिका' (डबल पॉलिसी) अपनाने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन ने सेवा ज्येष्ठता और कानूनी अड़चनों की ठीक से जांच किए बिना आनन-फानन में 2 जुलाई को नोटिस निकालकर महज 15 दिनों के भीतर इस विषय को सदन में ला दिया।
सदस्यों ने कहा कि उन्हें कनिष्ठ अभियंताओं की पदोन्नति से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उन उप-कनिष्ठ अभियंताओं के साथ भारी अन्याय हो रहा है जो 12 साल की लंबी सेवा अवधि पूरी करने के बाद भी पदोन्नति से वंचित हैं।
प्रदीप खोबरागड़े का मामला सदन में गूंजा कर्मचारियों के साथ हो रहे अन्याय का प्रत्यक्ष उदाहरण देते हुए आसीनगर जोन के विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता प्रदीप खोबरागड़े का मामला प्रमुखता से उठाया गया।
शंभरकर ने बताया कि सेवा ज्येष्ठता (सीनियरिटी) सूची में दूसरे क्रमांक पर होने के बावजूद प्रदीप खोबरागड़े को 2016 से देय पदोन्नति का लाभ आज तक नहीं मिला जबकि उन्हीं के साथ काम करने वाले अधिकारी को पदोन्नति का लाभ दे दिया गया। सदन में पुरजोर मांग की गई कि पूरी जांच-पड़ताल करके प्रदीप खोबरागड़े को 2016 से ही उनकी पदोन्नति का लाभ दिया जाए।
तमाम चर्चाओं और भेदभाव के आरोपों पर संज्ञान लेते हुए महापौर नीता ठाकरे ने स्पष्ट किया कि किसी की भी पदोन्नति पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन कर्मचारियों के बीच किया जा रहा भेदभाव तुरंत खत्म होना चाहिए, महापौर ने प्रशासन को हिदायत दी कि सेवा प्रवेश नियमों से जुड़े इस प्रस्ताव को इसी शर्त पर मंजूर किया जा रहा है कि 'किसी भी कर्मचारी पर अकारण अन्याय या अनुचित व्यवहार नहीं होना चाहिए'।