नागपुर मनपा का शैक्षणिक रिकॉर्ड्स डिजिटलीकरण (सोर्स: सोशल मीडिया)
नागपुर

नागपुर मनपा के स्कूलों में 1950-60 के रिकॉर्ड होंगे डिजिटल, पुराने दाखिलों की खोज होगी आसान, जानें पूरी खबर

Nagpur IT Department Educational Records Scan: नागपुर मनपा ने अपने स्कूलों के 6.75 लाख अतिरिक्त पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण के लिए 1.11 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वर्क ऑर्डर मंजूर किया है।

वेदांत जोशी

NMC School Records Digitization: नागपुर महानगरपालिका (NMC) के स्कूलों में वर्ष 1950 और 1960 के दशक में पढ़ाई कर चुके पूर्व छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। दशकों पुराने और जर्जर हो चुके शैक्षणिक दस्तावेजों को हमेशा के लिए सुरक्षित करने और उन्हें आसानी से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनपा प्रशासन रिकॉर्ड्स का व्यापक डिजिटलीकरण (Digitization) कर रहा है। मनपा की स्थायी समिति ने योजना के विस्तार को मंजूरी देते हुए अतिरिक्त दस्तावेजों को डिजिटल प्रारूप में बदलने के लिए 1.11 करोड़ रुपये के नए कार्यदेश (Work Order) को हरी झंडी दे दी है।

अनुमान से दो गुना अधिक निकले 'दाखिल-खारिज' रिकॉर्ड्स

नागपुर महानगरपालिका के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) विभाग द्वारा चलाई जा रही इस मुहिम के तहत 'मेसर्स टेकसिंक इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड' को 15 दिसंबर 2025 को काम सौंपा गया था। शुरुआत में 6.25 लाख पुराने दस्तावेजों को स्कैन करने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम शुरू होने के बाद स्कूलों में रिकॉर्ड्स की संख्या प्रारंभिक अनुमान से दोगुनी से अधिक पाई गई। जांच में करीब 6,75,000 अतिरिक्त रिकॉर्ड्स उजागर हुए, जिन्हें सुरक्षित करना अनिवार्य था।

14 रुपये प्रति रिकॉर्ड की दर पर 1.11 करोड़ का बजट

निविदा की मूल शर्तों के अनुसार, इन 6.75 लाख अतिरिक्त रिकॉर्ड्स के डिजिटलाइजेशन का काम भी प्रति रिकॉर्ड 14 रुपये की तय दर पर ही किया जाएगा। 94.50 लाख रुपये मूल लागत पर जीएसटी जोड़कर यह अतिरिक्त खर्च 1,11,51,000 रुपये तय किया गया है। इन सभी रजिस्टरों को स्कैन कर सेंट्रलाइज्ड क्लाउड बेस्ड ई-प्रशासन (MIS) प्रणाली में अपलोड किया जा रहा है, जिससे छात्रों को डिजिटल दाखिल-खारिज और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) सरलता से जारी किए जा सकेंगे।

1950 से पहले के सरकारी कामों में मिलेगी बड़ी मदद

राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए अक्सर 1950 से पहले के दाखिला रिकॉर्ड्स की मांग की जाती है। पुरानी कागजी कॉपियों के फटने, सड़ने या खराब होने का स्थायी खतरा बना रहता था और 1960 के दशक का रिकॉर्ड ढूंढने में कर्मचारियों के पसीने छूट जाते थे। अब क्लाउड बेस्ड डेटाबेस तैयार हो जाने से न केवल रिकॉर्ड्स हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएंगे, बल्कि दशकों पुराने दस्तावेज महज एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेंगे।

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