नागपुर में बाढ़ के खतरे से निपटने की तैयारी सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

2023 की बाढ़ के बाद अब खींचा जा रहा मास्टरप्लान! HC की सख्ती के बाद नागपुर मनपा ने बनाई हाइड्रोलिक योजना

Nagpur Flood Plan: तीन साल बाद नागपुर मनपा ने शहर के लिए व्यापक Flood Action Plan बनाने को मंजूरी दी है। 2023 की बाढ़ और हाई कोर्ट के स्वतः संज्ञान के बाद प्रशासन अब सक्रिय हुआ है।

अंकिता पटेल

Nagpur Flood Action Plan: पिछले 3 वर्षों की घोर लापरवाही के बाद नागपुर महानगर पालिका की ओर से अंततः शहर के लिए एक व्यापक 'फ्लड एक्शन प्लान' बनाने की कवायद को जा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में मनपा के सार्वजनिक निर्माणकार्य विभाग की ओर से रखे गए प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे हरी झंडी प्रदान की गई।

इस संदर्भ में सभापति शिवानी दानी ने कहा कि पिछले 3 सालों में मनपा ने एक भी बाढ़ नियंत्रण योजना नहीं बनाई थी लेकिन अब एक वृहद हाइड्रोलिक योजना का खाका खींचा जा रहा है। 2023 में आई बाढ़ के बाद अब प्रशासन हरकत में आया है, खासकर तब जब इस मामले पर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है।

50 वर्षों की समस्याओं का निकलेगा स्थायी समाधान

उन्होंने कहा कि आम जनता की ओर से प्रशासन से लगातार मांग की जा रही थी कि बाढ़ और जलभराव का कोई स्थायी समाधान दिया जाए। प्रशासन को उम्मीद है कि इस नई योजना के लागू होने से अगले 50 वर्षों तक शहर की बाढ़, स्टॉर्म वाटर, सीवेज और ड्रेनेज से जुड़ी सभी गंभीर समस्याएं पूरी तरह से हल हो जाएंगी।

डीपीआर बनाने में IIT और VNIT की ली जाएगी मदद

फिलहाल इस काम का प्रस्ताव रखा गया है और केवल डीपीआर तैयार करने का काम चल रहा है। असली कार्यवाही इसके बाद शुरू होगी। इस डीपीआर को वैज्ञानिक और सटीक बनाने के लिए आईआईटी, मुंबई और वीएनआईटी जैसी प्रतिष्ठित सरकारी संस्थाओं को शामिल करने का निर्देश दिया गया है।

हालांकि नागपुर मनपा आयुक्त के साथ हुई बातचीत में इन संस्थानों के पास इस बड़े काम के लिए पर्याप्त मैनपावर' होने पर भी चर्चा हुई। जैसे ही डीपीआर तैयार हो जाएगा, आगे की टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी जिससे शहरवासियों को लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या से मुक्ति मिल सके।

अधिकारियों में तालमेल का अभाव, हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों में भारी तालमेल की कमी है। 2023 की बाढ़ के समय जो अधिकारी तैनात थे, वे अब बदल चुके हैं और नए अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की पूरी जानकारी नहीं है।

यह भी स्पष्ट किया गया कि भले ही अधिकारी आते-जाते रहें लेकिन कुर्सी पर बैठने वाले नए अधिकारी को पिछली स्थितियों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। अधिकारियों की इसी लापरवाही और तालमेल की कमी के कारण ही हाई कोर्ट को इस मामले को स्वतः संज्ञान में लेना पड़ा।

शहर के चप्पे-चप्पे को कवर करेगा नया 'कॉम्प्रिहेंसिव प्लान'

इस नई और व्यापक योजना के तहत पूरे शहर को सुरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 3500 किलोमीटर लंबी हाइड्रोलिक लाइन का जाल बिछाया जाएगा। यह मास्टर प्लान मेट्रो क्षेत्रों, नेशनल हाईवे परिसरों, एयरपोर्ट इलाकों और एनआईटी क्षेत्रों सहित सभी महत्वपूर्ण विभागों को कवर करेगा। अधिकारियों के साथ हुई लगभग पौने दो घंटे की मैराथन बैठक में इस योजना के 'डीपीआर' (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) पर गंभीरता से चर्चा की गई।

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