सिविल लाइंस YMCA विवाद पहुंचा बॉम्बे हाई कोर्ट! मनपा की कार्रवाई के खिलाफ याचिका पर सुनवाई

Nagpur YMCA Case: नागपुर के सिविल लाइंस स्थित YMCA के कथित अवैध निर्माण मामले में हाई कोर्ट ने शिकायतकर्ता को हस्तक्षेप की अनुमति दे दी। शिकायतकर्ता की अर्जी अदालत ने स्वीकार कर ली।
High Court gets tough on YMCA's illegal construction
YMCA अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट सख्तसोर्स- सोशल मीडिया
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Nagpur YMCA Illegal Construction: नागपुर सिविल लाइंस स्थित वाईएमसीए (हीरामल थाली) के कथित अवैध निर्माण के खिलाफ मनपा द्वारा की गई कार्रवाई को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई के दौरान भले ही याचिकाकर्ता की ओर से मध्यस्थता के रूप में शिकायतकर्ता की अर्जी का विरोध किया गया हो किंतु शिकायतकर्ता की शिकायत पर ही कार्रवाई होने के कारण न्यायाधीश उर्मिला जोशी फालके और न्यायाधीश राज वाकोडे ने अनुरोध अस्वीकार कर शिकायतकर्ता की मध्यस्थ अजर्जी को स्वीकार कर लिया।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्याम देवानी और मध्यस्थता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवेन चौहान तथा मनपा की ओर से अधिवक्ता जेमीनी कासट ने पैरवी की, उल्लेखनीय है कि दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अदालत ने YMCA शिकायतकर्ता को इस मामले में हस्तक्षेप करने की अनुमति दे दी है।

शिकायत पर हुई थी कार्रवाई

बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान मध्यस्थता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता देवेन चौहान ने अदालत को बताया कि

महानगर पालिका द्वारा YMCA को जो नोटिस जारी किया गया है, वह वास्तव में मध्यस्थ द्वारा की गई शिकायत के आधार पर ही जारी किया गया है। YMCA की ओर से पेश हुए अधिवक्ता श्याम देवानी ने इस मध्यस्थता याचिका का कड़ा विरोध किया।

उनका तर्क था कि इस मामले में विवादित कार्रवाई सीधे तौर पर महानगर पालिका द्वारा की गई है, इसलिए तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है किंतु हाई कोर्ट ने उनकी दलील को मानने से साफ इनकार कर दिया।

याचिका में हालिया घटनाक्रम जोड़ने की अनुमति

सुनवाई के दौरान अदालत ने YMCA द्वारा दायर एक अन्य आवेदन को भी मंजूरी दे दी। इसके तहत YMCA ने स्टि याचिका दायर करने के बाद हुए 'बाद के घटनाक्रमों' को रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति मांगी थी।

अदालत ने YMCA को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक संशोधन करने और इसकी प्रति उत्तरदाताओं को सौंपने का निर्देश दिया है। चूंकि नागपुर महानगर पालिका ने पहले ही अपना जवाब दाखिल कर दिया है, इसलिए अदालत ने मनपा को याचिका के संशोधित हिस्से पर अपना अतिरिक्त जवाब दाखिल करने की छूट दी।

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शिकायतकर्ता मामले में प्रभावित पक्ष: कोर्ट

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही विवादित नोटिस महानगर पालिका द्वारा जारी किया गया है लेकिन यह कार्रवाई मध्यस्थता (शिकायतकर्ता) के कहने और मामले को मनपा के साथ लगातार उठाने के कारण शुरू हुई है। अदालत ने माना कि मध्यस्थता इस मामले में प्रभावित पक्ष है, इसलिए उनकी हस्तक्षेप याचिका को स्वीकार कर लिया गया। अदालत ने YMCA को निर्देश दिया कि वे अपनी याचिका में संशोधन करके हस्तक्षेपकर्ता को एक पक्ष के रूप में शामिल करें।

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