नागपुर मनपा12 जोन विवाद नवभारत डिजाइन फोटो
नागपुर

नागपुर मनपा में हंगामा! 12 जोन बनाने के मुद्दे पर झुका सत्ता पक्ष, सदन में लगे जय संविधान व जय श्रीराम के नारे

Nagpur 12 Zones: नागपुर मनपा सभा में 12 जोन के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। ‘जय संविधान’ और ‘जय श्रीराम’ के नारों से करीब 10 मिनट तक सदन गरमाया रहा।

अंकिता पटेल

Nagpur NMC 12 Zones: नागपुर में सोमवार को मनपा की सभा में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब मनपा के 12 जोन बनाने के विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद हुए। हंगामे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विपक्ष के आगे सत्ता पक्ष को अंततः झुकना पड़ा जिसके चलते महापौर को भी अपना फैसला बदलना पड़ गया।

आलम यह था कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच चल रही खींचतान के बीच ही सदन में ही नारेबाजी शुरू हो गई जहां विपक्ष की ओर से 'जय संविधान' के नारे लगाए गए वहीं विपक्ष की आवाज दबाने के लिए सत्ता पक्ष की ओर से 'जय श्रीराम' के नारे लगाए गए। सदन में लगभग 10 मिनट तक दोनों दलों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला।

10 मिनट के लिए स्थगित हुई सदन की कार्यवाही

हंगामे का आलम यह था कि जमकर चल रही नारेबाजी के कारण कामकाज बाधित होते देख महापौर नीता ठाकरे को सदन का कामकाज 10 मिनट तक के लिए स्थगित करना पड़ गया।

भले ही सदन की कार्यवाही स्थगित रही लेकिन विपक्ष की ओर से नारेबाजी थमने का नाम नहीं ले रही थी। 10 मिनट के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने के बावजूद पहले दिए गए फैसले को बदलने के लिए विपक्ष नेता संजय महाकालकर द्वारा मांग रखे जाने तथा इस पर रूलिंग बदलने के बाद ही सदन की कार्यवाही शुरू हो गई।

महापौर ने 12 जोन बनाने के लिए प्रशासन को नियमों के अनुसार अगली आम सभा में सदन के विचारार्थ प्रस्ताव रखने के निर्देश दिए।

24 साल पहले बने थे 10 जोन, अब 33 लाख पहुंची आबादी सभागृह में पार्षद बंडू राऊत ने इस विषय को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन से जवाब मांगा कि वर्तमान 10 जोनों का गठन कब हुआ था और उस समय शहर की जनसंख्या कितनी थी।

चर्चा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2002 में नागपुर मनपा में 10 प्रशासनिक जोन बनाए गए थे जिसे अब लगभग 24 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार शहर की आबादी 24,47,000 थी जो अब बढ़कर लगभग 33,00,000 हो चुकी है। बंडू राऊत ने सदन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि मनपा में कई ग्रामीण इलाकों का समावेश होने के कारण शहर का विस्तार बहुत अधिक हो गया है।

स्थिति यह है कि यदि कोई जूनियर इंजीनियर (जेई) किसी ग्रामीण इलाके के दौरे पर जाता है तो उसे पूरा दिन लग जाता है और जोन का बाकी काम प्रभावित होता है। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने जोनों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रशासन से विस्तृत अध्ययन कर नया प्रस्ताव लाने की मांग की।

संसाधनों का अभाव और अधिकारियों पर अतिरिक्त बोझ

जोनों की संख्या बढ़ाने के विषय पर सदन में उपस्थित वरिष्ठ पार्षद आभा पांडे ने जमीनी हकीकत बयान की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एक-एक जोन के अंतर्गत 4 प्रभाग और 16 नगरसेवक आते हैं लेकिन साफ-सफाई के लिए गाड़‌यां और कर्मचारी ही उपलब्ध नहीं हैं। सहायक आयुक्तों के पास कचरा उठाने के लिए अतिरिक्त ट्रक उपलब्ध कराने तक के अधिकार या संसाधन नहीं हैं और शहर की सड़कें गड्डों से भरी हैं।

सदन में यह बात भी मजबूती से रखी गई कि मनपा में 'मैनपावर' की भारी कमी है। जूनियर इंजीनियरों (जेई) को नगर रचना जैसे कई विभागों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अधिकारियों पर 3-3 प्रभार होने के कारण जनता के काम अटक रहे हैं और एक सामान्य फाइल बनाने में भी 8-8 दिन का समय लग रहा है।

24 सालों से बिना परेशानी चल रहे 10 जोन

विपक्ष नेता संजय महाकालकर ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 24 सालों से शहर 10 जोनों के अंतर्गत ही चल रहा है।

पिछले 4 साल जब मनपा में प्रशासक राज था तब भी कामकाज में कोई अड़चन नहीं आई और न ही तत्कालीन आयुक्त ने कभी जोन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया।

उन्होंने तर्क दिया कि जब वर्तमान में नगरसेवकों के काम करने के लिए पर्याप्त अधिकारी ही नहीं है तो इस विषय को प्रशासन के पास भेजकर नए जीन बनाने की चर्चा करने का औचित्य नहीं है।

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