नागपुर विधान भवन विस्तार योजना अटकी: तकनीकी खामियों के कारण नगर रचना विभाग ने अब तक नहीं दी नक्शे को मंजूरी

Nagpur Vidhan Bhavan: नागपुर में 1000 करोड़ का नया विधान भवन परिसर नक्शा मंजूर न होने से अटका है। तकनीकी खामियों के कारण देरी हो रही है, जिससे 2028 तक काम पूरा होना मुश्किल लग रहा है।
The 1000-cr Nagpur Vidhan Bhavan expansion is delayed as the town planning dept rejected the map due to technical flaws, making the 2028 deadline unlikely.
विधान भवन परिसर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Nagpur Vidhan Bhavan Expansion Project: राज्य सरकार ने एक नए और अत्याधुनिक विधान भवन परिसर के निर्माण को औपचारिक मंजूरी देकर महात्वाकांक्षी परियोजना पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत और इसे 2028 तक पूरा करने का भले ही लक्ष्य रखा हो लेकिन यह लक्ष्य पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विधान भवन के विस्तारित इमारत का अब तक नवशा ही मंजूर नहीं हो पाया है।

आलम यह है कि अब तक इसका नक्शा कई बार तकनीकी खामियों के चलते नगर रचना विभाग द्वारा वापस लौटाया जा चुका है। बहरहाल अब नक्शा मंजूरी अंतिम चरणों में होने का भले ही दावा किया जा रहा हो लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। उल्लेखनीय है कि अब तक विधान भवन की इमारत का विस्तार शासकीय मुद्रणालय की जगह तक होने की अनुमान लगाया जा रहा था। नगर रचना विभाग के अधिकारियों के अनुसार विधान भवन के पीछे मनपा की 22,000 वर्गफुट से अधिक की जमीन है जो पहले बसों की पार्किंग के लिए उपयोग की जा रही थी।

अब उसे खाली कर दिया गया है। विधान भवन और इस जमीन के बीच की सड़क मिलाकर पूरे परिसर में विस्तारित निर्माण कार्य होने जा रहा है जिससे अब शासकीय मुद्रणालय तक जाने या फिर अंडरग्राउंड सब-वे बनाने की आवश्यकता नहीं रह गई है। मनपा द्वारा दी जा रही जमीन के बदले मनपा को शासकीय मुद्रणालय की जमीन में से कुछ हिस्सा आवंटित किया जाएगा।

नक्शा मंजूरी के बाद ही टेंडर नगर रचना विभाग के अनुसार एक से डेढ़ माह के बीच नक्शे को मंजूरी मिल सकती है। हालांकि कुछ तकनीकी खामियां होने के कारण उसकी पूर्तता करने के निर्देश एमएसआईडीसी और हफीज कॉन्ट्रैक्टर को दिए गए हैं। जहां से खामियां रहित नक्शा आने के बाद उसे मंजूरी प्रदान की जाएगी।

मंजूरी मिलने के बाद ही इसके टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। जानकारों के अनुसार राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी प्रकल्प और मनपा में भाजपा की सत्ता होने के बाद भी नक्शे को मंजूरी नहीं मिलना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। यहां तक कि नक्शे में खामियां कैसे रह रही हैं? यह भी सवालों के घेरे में है।

मुख्य भवन (प्लॉट 1) की प्रमुख खासियतें

  • प्लॉट 1 पर बनने वाले मुख्य ढांचे में 4 मंजिलों के भीतर ए. बी और सी ब्लॉक शामिल होंगे जिनका निर्मित क्षेत्र 62,924 वर्गफुट होगा।
  • नए विधानसभा हॉल में 400 सदस्यों के बैठने की क्षमता होगी।
  • विधान परिषद कक्ष में 120 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी।
  • 700 लोगों की क्षमता वाला एक विशाल सेंट्रल हॉल बनाया जाएगा, ताकि दोनों सदनों की संयुक्त बैठकें आसानी से आयोजित की जा सकें।

2 प्लॉटों में होगा निर्माण

  • प्लॉट 1: इस हिस्से में नए विधान मंडल भवन और एनेक्स ढांचों का निर्माण होगा। इसके लिए जीएसटी और अन्य शुल्कों सहित 662।89 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
  • प्लॉट 2: इस प्लॉट पर एक नई प्रशासनिक इमारत और महाराष्ट्र में पंजीकृत राजनीतिक दलों के कार्यालयों का निर्माण होगा। इसके लिए 339।78 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

महाराष्ट्र राज्य अवसंरचना विकास निगम दोनों परियोजनाओं के लिए कार्यान्वयन एजेंसी होगी। दोनों प्लॉटों के टेंडर इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन के आधार पर जारी किए जाएंगे। 1920 की ब्रिटिशकालीन इमारत की लेगा जगह यह नया और भव्य परिसर मौजूदा विधान भवन की जगह लेगा जो 1920 में बनी एक ब्रिटिशकालीन इमारत है। यह पुरानी इमारत वर्तमान विधायी आवश्यकताओं के लिए काफी समय से अपर्याप्त मानी जा रही थी।

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