हाई कोर्ट (फाइल फोटो) 
नागपुर

ZP चुनाव में नए आरक्षण रोटेशन पर फैसला आज, हाई वोल्टेज मामला, फैसले पर सभी की नजरें

Maharashtra Local Body Elections: जिला परिषद चुनावों में आरक्षण रोटेशन के हाई वोल्टेज मामले में आज फैसला आने वाला है। सभी राजनीतिक पार्टियों और कार्यकर्ताओं की नजर आज इस फैसले पर टिकी है।

प्रिया जैस

Zilla Parishad Elections: महाराष्ट्र में आगामी जिला परिषद चुनाव को लेकर सीट आरक्षण रोटेशन के नये नियमों को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। इस पर हुई लंबी बहस के बाद कोर्ट ने जहां सुनवाई खत्म कर दी वहीं फैसला सुरक्षित कर लिया। याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आरएल खापरे और अधिवक्ता महेश धात्रक ने चुनावों को लेकर चल रही प्रक्रिया को देखते हुए फैसला जल्द देने का अनुरोध भी कोर्ट से किया था।

इसके अनुसार अब केवल 4 दिनों के भीतर ही हाई कोर्ट की ओर से शुक्रवार को जिला परिषद चुनाव में नये आरक्षण रोटेशन पर फैसला सुनाया जाएगा। महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति (सीटों के आरक्षण का तरीका और रोटेशन) नियम 2025 के नियम 12 को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये नये नियम असंवैधानिक, मनमाने और अन्यायपूर्ण हैं क्योंकि ये पिछले आरक्षण रोटेशन को अधूरा छोड़ते हुए 2025 के चुनाव को ‘पहला चुनाव’ मान रहे हैं।

संविधानसम्मत प्रणाली, सरकारी दावा

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की पैरवी कर रहे महाधिवक्ता बीरेन्द्र सराफ ने कहा कि कई ग्रामीण क्षेत्र वर्तमान में जिला परिषद और नगर परिषद में शामिल हो चुके हैं जिससे न केवल सीमांकन बदलने बल्कि मतदाताओं की संख्या बदलने से इनकार नहीं किया जा सकता है। मतदाताओं की संख्या के अनुरूप ही आरक्षण तय किया जाएगा।

अंतिम परिणाम में रोटेशन के अनुसार किसे लाभ होगा? यह फिलहाल कहा नहीं जा सकता है, जबकि याचिकाकर्ता इसका मात्र अंदाजा लगा रहे हैं। जिस समय कानून को लागू किया जा रहा था उसका अंतिम परिणाम क्या होगा? इसे देखकर नहीं किया गया बल्कि संविधान में प्रदत्त अधिकारों का उपयोग कर नये सिरे से राज्य सरकार ने यह प्रणाली लागू की है।

संवैधानिक अधिकारों का हुआ उल्लंघन

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह नया नियम पिछले रोटेशन को बाधित करने के इरादे से पेश किया गया है जो 1996/2002 से जारी था और पूरा होने के कगार पर था। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार का यह कदम संविधान के अनुच्छेद 243-K और 243-E13 तथा अनुच्छेद 243-D9 के प्रावधानों के सीधे विपरीत है।

अनुच्छेद 243-D के अनुसार, आरक्षण रोटेशन के माध्यम से दिया जाना चाहिए, ताकि आरक्षित सीटों की सभी श्रेणियों को प्रतिनिधित्व मिल सके। नये नियम के लागू होने से अधूरे रोटेशन को छोड़ दिया जाएगा और 2025 के चुनाव को पहले चुनाव के रूप में मानकर आरक्षण प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाएगा।

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